Police Crack Down on HSRP Violations : नारनौल। पुलिस ने यातायात नियमों के उल्लंघन और बढ़ते साइबर खतरों को लेकर सख्त रुख अपनाया है। एसपी दीपक कुमार के निर्देश पर बिना एचएसआरपी, अस्पष्ट नंबर प्लेट और नंबर छिपाने वाले वाहनों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जाएगा। साथ ही सरकारी व निजी संस्थानों को संवेदनशील दस्तावेज सार्वजनिक एआई टूल पर अपलोड न करने और डिजिटल सुरक्षा मजबूत करने की सलाह दी गई है।
पुलिस अधीक्षक दीपक कुमार ने पुलिस महानिदेशक हरियाणा अजय सिंघल के निर्देशों की अनुपालना में हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (एचएसआरपी) नियमों के उल्लंघन के खिलाफ विशेष अभियान चलाने तथा एआई आधारित साइबर खतरों को लेकर डिजिटल सुरक्षा मजबूत करने के निर्देश दिए हैं। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि नंबर प्लेट से छेड़छाड़ कर वाहन की पहचान छिपाने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी, वहीं कार्यालयों में एआई टूल का इस्तेमाल करते समय गोपनीय रिकॉर्ड और निजी जानकारी की सुरक्षा को प्राथमिकता देनी होगी।
पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि विशेष अभियान के दौरान बिना नंबर प्लेट, निर्धारित मानकों के अनुरूप एचएसआरपी नहीं लगाने, नंबर प्लेट पर टेप या स्टीकर लगाकर अक्षर-अंक छिपाने तथा धुंधली, ढकी हुई या अस्पष्ट नंबर प्लेट वाले वाहनों की जांच की जाएगी। ऐसे वाहनों पर लागू कानूनी प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई करते हुए नियमानुसार इम्पाउंड भी किया जा सकता है। पुलिस अधीक्षक ने सभी थाना प्रभारियों और यातायात पुलिस को प्रभावी जांच करने तथा वाहन चालकों को नियमों के प्रति जागरूक करने के निर्देश दिए हैं।
उन्होंने कहा कि नंबर प्लेट वाहन की पहचान का महत्वपूर्ण आधार है। स्पष्ट नंबर प्लेट होने से यातायात व्यवस्था बनाए रखने के साथ वाहन चोरी, सड़क दुर्घटनाओं और अन्य आपराधिक घटनाओं में संबंधित वाहन की पहचान करने में मदद मिलती है। वाहन मालिक सुनिश्चित करें कि उनके वाहन पर निर्धारित मानकों के अनुरूप एचएसआरपी लगी हो और पंजीकरण नंबर साफ एवं आसानी से पढ़ने योग्य हो। नंबर प्लेट क्षतिग्रस्त होने या उसके अक्षर-अंक अस्पष्ट होने पर उसे निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार बदलवाया जाए।
महेंद्रगढ़ पुलिस ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के बढ़ते उपयोग के बीच सरकारी व निजी कार्यालयों, शिक्षण संस्थानों, अस्पतालों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों को डिजिटल सुरक्षा के प्रति भी आगाह किया है। पुलिस प्रवक्ता के अनुसार, भारत सरकार की साइबर सुरक्षा एजेंसी CERT-In ने एआई एजेंटों के माध्यम से भारतीय संस्थानों के सिस्टम तक अनधिकृत पहुंच की घटनाओं के संबंध में चेतावनी दी है। ऐसे में संस्थानों को अपनी डिजिटल सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करने और संवेदनशील जानकारी की सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता है।
पुलिस ने बताया कि एआई एजेंट ऐसे कंप्यूटर प्रोग्राम हैं, जो किसी कार्य को पूरा करने के लिए कई चरणों में स्वयं कार्रवाई कर सकते हैं। इन्हें कार्यालय की ईमेल, फाइलों और अन्य डिजिटल सेवाओं से जोड़ते समय केवल आवश्यक अनुमति ही दी जानी चाहिए। किसी दस्तावेज का सार तैयार करने वाले एआई टूल को सभी फाइलों में बदलाव करने, उन्हें मिटाने या बाहर भेजने की अनुमति देना जोखिम बढ़ा सकता है। इसलिए संवेदनशील कार्यों में अधिकृत कर्मचारियों की निगरानी जरूरी है।
कर्मचारियों को निर्देशित किया गया है कि वे कार्यालय की गोपनीय फाइलें, नागरिकों के पहचान दस्तावेज, बैंक संबंधी विवरण और अन्य संवेदनशील जानकारी बिना अधिकृत अनुमति के सार्वजनिक एआई वेबसाइटों या ऐप पर अपलोड न करें। संस्थान यह भी निर्धारित करें कि कार्यालय के कामकाज में किन एआई साधनों का इस्तेमाल किया जा सकता है। महत्वपूर्ण निर्णयों और संवेदनशील डिजिटल गतिविधियों की अधिकृत व्यक्ति से जांच कराई जाए।

