उन्होंने बताया कि बार-बार पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने से हवाओं की दिशा और गति में बदलाव हो रहा है। इसके चलते तापमान में भी उतार-चढ़ाव बना हुआ है। वर्तमान में दक्षिण-पूर्वी हवाओं के प्रभाव से दिन और रात के तापमान में गिरावट दर्ज की जा रही है। मौसम विशेषज्ञ के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से सिरसा, फतेहाबाद, हिसार, जींद, कैथल, कुरुक्षेत्र, पंचकूला, अंबाला, यमुनानगर और करनाल सहित कई जिलों में तेज हवाओं के साथ हल्की बारिश और बूंदाबांदी दर्ज की गई। कैथल और कुरुक्षेत्र जिलों में कुछ स्थानों पर छिटपुट ओलावृष्टि की गतिविधियां भी देखने को मिलीं।
उन्होंने बताया कि मौजूदा मौसम प्रणालियों के कारण हरियाणा और आसपास के क्षेत्रों में बादलों की आवाजाही बनी हुई है। पश्चिमी विक्षोभ और वायुमंडल में सक्रिय चक्रवातीय परिसंचरण के प्रभाव से प्रदेश के उत्तरी हिस्सों में मौसम का असर अपेक्षाकृत अधिक दिखाई दे रहा है। डॉ. चंद्रमोहन ने बताया कि इस वर्ष अल-नीनो परिस्थितियों के प्रभाव के बीच हरियाणा, एनसीआर और दिल्ली में मानसूनी बारिश के आंकड़े सामान्य से नीचे रहे। मानसून की वापसी के बाद लगातार पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने से मौसम में बदलाव देखने को मिल रहा है। उत्तरी पर्वतीय क्षेत्रों में बारिश और हल्की बर्फबारी तथा हरियाणा के उत्तरी जिलों में बारिश की गतिविधियों का असर आसपास के क्षेत्रों के तापमान पर भी पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में हरियाणा, एनसीआर और दिल्ली के अधिकांश क्षेत्रों में तापमान में हल्की गिरावट होने की संभावना है। सुबह और शाम के समय मौसम में ठंडक महसूस होने लगी है। वातावरण में हल्की ठंडी हवा के कारण मौसम सुहावना होने लगा है। मौसम विशेषज्ञ के अनुसार, आगामी दिनों में बादलों की आवाजाही और हवाओं की दिशा में बदलाव जारी रह सकता है। कमजोर पश्चिमी विक्षोभों के कारण व्यापक बारिश की संभावना कम है, लेकिन कुछ स्थानों पर हल्की बूंदाबांदी से मौसम प्रभावित हो सकता है। तापमान में होने वाले उतार-चढ़ाव के बीच सुबह और शाम की ठंडक धीरे-धीरे बढ़ने के आसार हैं।

