Site icon Dainik Savera Times

भगवान वाल्मीकि की शिक्षाएं समरस समाज की आधारशिला : ऋषभ गुप्ता

Rishabh Calls for Social Harmony on Valmiki Prakat Diwas : करनाल। भगवान वाल्मीकि की शिक्षाएं समाज को सत्य, ज्ञान, सदाचार और मानवता की सेवा का मार्ग दिखाती हैं। उनके आदर्श सामाजिक समरसता, आपसी सद्भाव और समानता पर आधारित समाज के निर्माण की प्रेरणा देते हैं।

युवा समाजसेवी एवं महापौर रेणु बाला गुप्ता के सुपुत्र ऋषभ गुप्ता ने यह बात सदर बाजार स्थित वाल्मीकि बस्ती में भगवान वाल्मीकि प्रकट दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित समारोह में सहभागिता करते हुए कही। उन्होंने भगवान वाल्मीकि को श्रद्धापूर्वक नमन किया और उपस्थित लोगों को प्रकट दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। युवा समाजसेवी ऋषभ गुप्ता ने कहा कि भगवान वाल्मीकि का जीवन और उनकी शिक्षाएं आज भी प्रासंगिक हैं। उनके विचारों से प्रेरणा लेकर समाज में प्रेम, भाईचारे, समानता और सद्भाव की भावना को मजबूत किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि किसी भी समाज की वास्तविक प्रगति तभी संभव है, जब उसमें प्रत्येक व्यक्ति के प्रति सम्मान, सहयोग और मानवीय संवेदनाओं का भाव हो। भगवान वाल्मीकि के आदर्श हमें इन्हीं मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने कहा कि महर्षि वाल्मीकि का व्यक्तित्व ज्ञान, साधना और सकारात्मक परिवर्तन का प्रतीक है। उनके जीवन से प्रेरणा लेकर युवाओं को समाजहित के कार्यों में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। सामाजिक समरसता केवल विचारों तक सीमित न रहे, बल्कि हमारे व्यवहार और दैनिक जीवन में भी दिखाई देनी चाहिए। उन्होंने सभी से भगवान वाल्मीकि के आदर्शों को आत्मसात कर एक समरस, सशक्त और संस्कारवान समाज के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।

समारोह में भगवान वाल्मीकि के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए उपस्थित लोगों ने उनके आदर्शों को याद किया। आयोजन ने सामाजिक एकता, आपसी सहयोग और समरसता के संदेश को आगे बढ़ाने का अवसर प्रदान किया। समारोह के माध्यम से भगवान वाल्मीकि के आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाने और सामाजिक सद्भाव की भावना को मजबूत बनाने का संदेश दिया गया। समारोह में विधायक जगमोहन आनंद ने भी अपने संबोधन में भगवान वाल्मीकि के जीवन और शिक्षाओं के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि महर्षि वाल्मीकि की शिक्षाएं समाज को सदाचार, ज्ञान और मानवीय मूल्यों के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती हैं। उनके आदर्शों को अपनाकर समाज में आपसी भाईचारे और सामाजिक एकता को और मजबूत किया जा सकता है। उन्होंने लोगों से महर्षि वाल्मीकि के संदेश को अपने जीवन में उतारने तथा समाज में सद्भाव बनाए रखने का आह्वान किया।

Exit mobile version