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साहित्य, शायरी और कविताओं से सजी ‘सांझा विरासत’ की महफिल

‘Sanjha Virasat’ Celebrates Literature & Poetry : करनाल। विकास क्लब साहित्य कला मंच कुंजपुरा की ओर से आयोजित ‘सांझा विरासत’ कार्यक्रम में साहित्य, शायरी और कविता का शानदार संगम देखने को मिला। प्रदेशभर से पहुंचे वरिष्ठ साहित्यकारों, शायरों और कवियों ने विभिन्न भाषाओं व विधाओं में अपनी रचनाएं प्रस्तुत कर समां बांध दिया। भावपूर्ण रचनाओं पर दर्शकों ने जमकर तालियां बजाईं।

कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ कवि प्रेमपाल सागर ने करते हुए कहा कि सर्वप्रथम कलम जिसने भी उठाई होगी, ज्ञान की फसल शब्दों में उगाई होगी, वो कोई इंसान या फरिश्ता नहीं होगा, हकीकतन ये सौगात खुदाई लाई होगी। इसके पश्चात भगवान शिव का गुणगान रोहतक से पहुंचे देसी कवि संदीप विशिष्ठ ने कहा कि त्याग की मिसाल कोई शिवशंकर से सीख लो, सदी गर्मी कठितनाई सहना वाघम्बर से सीख लो। इनके पश्चात सोनीपत से पहुंचे अजीम शायर डा. कमर रईस ने कहा दिल से जो आप का हो गया, वो वशर क्या से क्या हो गया। इनके बाद आज के हालात पर करनाल से डा. दिलीप खरेरा ने कहा कि भीड में जुनून है, खंजरों पे खून है, विभत्स ये दृश्य है, हर शख्स बेसुकून है।

किसानों का दर्द पढ़ते हुए हरियाणा की प्रसिद्ध कवित्री लघुकथाकार डा. ज्ञानी देवी ने कहा कि सपने बहाकर ले गई है किसान के, वो जिन बौछारों की बात करते हैं, बुनियाद के दर्द को अनसुना करके वो बस मीनारों की बात करते हैं। सोनीपत से अनिल खरब ने हरियाणा विधा में व्यंग्य पढ़ते हुए ढोंगी बाबाओं पर तीखे हमले करते हुए कह कि इनसे सावधान रहने की जरूरत है, सारे बाबे क_े होके मौज उडावन लाग्गे, पढ़े लिखे लोगों ने बेवकूफ बनावन लाग्गे। कर्णनगरी से कवित्री रोजलीन ने कहा कुछ चेहरे कभी आखिरी बार के लिए नहीं होते, वो हमेशा पहली बार देखे और महसूस किए गए।

करनाल के गांव नेवल खुर्द से पंजाबी कवि मास्टर नरेंद्र संधू ने कहा उन अपनां दा की करिये जो दिल नू घायल कर गए, अरमानां दे घूंघरू बिखेरे सुन्नी पायल कर गए। घरौंडा से चंदवती दीक्ष्ज्ञित ने कहा आजादी सबने प्यारी सै, हम राखैंगे इसका ख्याल सरहद उपर जान देणिये, कहते भारत के सब लाल। वरिष्ठ शायर हरबंस पथिक ने कहा कि मुझे अपनी बात कहना भी नहीं आया, साथ अपनो के रहना भी नहीं आया। ममता प्रवीन ने कहा कि दिल के दरवाजे पर दस्तक देकर, कितने ही शब्द चले गए, मैं कुछ न कह पाई वो अपना कहकर चले गए। पानीपत से पहुंचे शायत इकबाल पानीपती की गजल पर खूब तालियां बजी। इसके बाद अश्वनी शर्मा ने भी उमदा गजल पढ़ी। युवा रचनाकार रामेश्वर देव ने कलाम से सबका दिल जीता।

पुरन चंद वत्स ने डा. कमर रईस की गजल पढक़र महफिल में राग व स्वर बंदिश का रंग जमाया… किसी को किसी से मुहब्बत नहीं है, जहां में किसी दिल में हुरमत नहीं है। सुरिन्द्र मचल ने कहा टूट चुके सब अरमां हमारे, जिये भी तो अब किसके सहारे। हरिओम ने कहा कि मां के प्यार की कोई कीमत नहीं है। इस अवसर पर ईश्वर, डा. शीशपाल कादियान, डा. राम कुमार, मामपाल, पवन देव, सौरभ गुप्ता, रविन्द्र गुगलानी, कुमारी सैजल, अंशुल राणा, अनिल आर्य प्रधान आर्य समाज कुंजपुरा, संतोषा राणा, मास्टर राकेश राणा, सुलोचना, कृष्णा, अनीता, अवनी, अव्युक्त आर्य, पारस गहलोत, महेंद्र, रविंदर, दुर्गेश, रोहित, श्री राम सेवा सनातन के उप प्रधान विक्की सिंह सहित अन्य मौजूद रहे।

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