हिसार। Sant Rampal released संत रामपाल शुक्रवार शाम हिसार की सेंट्रल जेल से रिहा हो गया। उसकी रिहाई के दौरान पुलिस ने कड़े सुरक्षा इंतजाम किए थे और जेल के बाहर बैरिकेडिंग की थी। रिहाई के बाद संत रामपाल को 5-6 गाड़ियों के काफिले के साथ जेल से बाहर लाया गया।
पूरी हुई रामपाल की जमानत प्रक्रिया
संत रामपाल की जमानत का मामला एडीएसजे गगनदीप की अदालत में चला, जहां उसके समर्थकों ने 5-5 लाख के बेल बॉन्ड जमा कराए। अधिवक्ता महेंद्र ने बताया कि सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद ही रिहाई हो पाई। रोहतक के करोंथा गांव स्थित आश्रम में हिंसा हुई थी। इसमें एक मौत हो गई थी। इसके बाद पुलिस ने संत रामपाल पर हत्या का मामला दर्ज कर लिया था।
2014 में दोबारा किया था गिरफ्तार

22 महीने जेल में रहने के बाद अप्रैल 2008 में उसे जमानत मिल गई थी, जिसके बाद वह हिसार के बरवाला स्थित आश्रम में रहने लगा। जुलाई 2014 में संत रामपाल को अदालत में पेश होना था, लेकिन इस दौरान उसके समर्थकों और वकीलों के बीच टकराव हो गया। इसके बाद वकीलों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट ने रामपाल को पेश होने के आदेश दिए, लेकिन पेश न होने पर पुलिस को उसे गिरफ्तार करने का आदेश दिया।
गिरफ्तारी से बचने के लिए बनाई थी कड़ियां
गिरफ्तारी से बचने के लिए रामपाल ने बरवाला आश्रम के चारों ओर समर्थकों की मानव कड़ियां बनवा दी थी। नवंबर 2014 में पुलिस ने आश्रम की घेराबंदी की, जो करीब 14 दिन चली। 18 नवंबर को पुलिस आश्रम में दाखिल हुई, जहां महिलाओं, बच्चों और निजी सुरक्षाकर्मियों के बीच छिपे रामपाल को गिरफ्तार किया।
इंजीनियर से कैसे संत बना रामपाल
रामपाल सोनीपत के धनाना गांव का रहने वाला है। उसने सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियर की नौकरी छोड़कर वर्ष 1995 में रोहतक के करौंथा में सतलोक आश्रम की स्थापना की और नामदान देना शुरू किया। इसके बाद वह कबीर पंथी संप्रदाय के प्रमुख के रूप में उभरा। आर्य समाज पर विवादित टिप्पणियों से उसके अनुयायियों और आर्य समाज के लोगों के बीच टकराव भी हुआ। देशभर में उसके करीब 15 आश्रम हैं, जिनमें से भिवानी, सोनीपत, रोहतक और हिसार प्रमुख हैं। बरवाला आश्रम फिलहाल कोर्ट केस के चलते अटैच संपत्ति है।
11 साल 4 महीने और 20 से है बंद
अब पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट से जमानत मिली है। करीब 11 साल, 4 महीने और 20 दिन से वह हिसार की जेल में बंद है और अब जेल से बाहर आएगा। हाईकोर्ट का जमानत आदेश संबंधित ट्रायल कोर्ट में पहुंचेगा। वहां बॉन्ड भरने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद आदेश जेल प्रशासन तक आएंगे और फिर रामपाल को रिहा किया जाएगा। उधर, संत राम पाल को बेल मिलने की खबर पर भक्तों में खुशी की लहर है।
धर्म प्रचार की मनाही नहीं
यदि रामपाल के वकील की मानें तो उनका कहना है कि उनके खिलाफ हिसार की स्पेशल कोर्ट में ट्रायल चल रहा था जो कि अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। इसके अलावा उनके खिलाफ बाकी जितने भी मामले थे, उसमें वो या तो बरी हो चुके थे या जमानत मिल चुकी थी। जमानत की शर्तों के मुताबिक वो कोई भीड़ जमा नहीं कर सकेंगे और हम पहले ही इसके बारे में कोर्ट को बता चुके है, लेकिन अपनी बात कहने या धर्म के प्रचार करने में कोई मनाही नहीं है।
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