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Nagar Nigam : सत्ता की अधूरी सीढ़ी : मेयर के बाद की इन दो कुर्सियों पर सस्पेंस

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Suspense over these two positions after the mayor : चंडीगढ़। प्रदेश के नगर निगमों में लोकतंत्र का पहिया आधा-अधूरा घूमता नजर आ रहा है। शहरों को मेयर मिल चुके हैं, पार्षदों ने शपथ लेकर जिम्मेदारियां संभाल ली हैं और सदन भी अस्तित्व में आ चुके हैं, लेकिन सत्ता की दो अहम कुर्सियां—सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर अभी खाली हैं।

याद आ रही पुरानी प्रक्रिया

चुनाव पूरे होने के कई महीनों बाद भी इन पदों पर नियुक्ति नहीं होने से नगर निगमों की कार्यप्रणाली और राजनीतिक समीकरणों पर सवाल उठने लगे हैं। प्रदेश के अधिकतर नगर निगमों में यह इंतजार कब खत्म होगा, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं। बता दें कि मार्च 2025 में मानेसर नगर निगम का भी चुनाव हुआ था केवल यहीं पर सीनियर और डिप्टी मेयर का चुनाव हो सका है। नगर निगम कानून आज भी उस दौर की कहानी कहता है जब मेयर का चुनाव पार्षद किया करते थे। अब मेयर सीधे जनता चुनती है, लेकिन कानून की कई धाराओं में आज भी पार्षदों की ओर से मेयर चुनने का जिक्र दर्ज है।

अंबाला को लेनी पड़ी थी कोर्ट की शरण

निगम की राजनीति में सीनियर डिप्टी मेयर का पद केवल सम्मान का विषय नहीं होता। इसे अक्सर भविष्य की राजनीति का लांचिंग पैड माना जाता है। पंचकूला का नाम शायद इसलिए भी याद रखा जाएगा, क्योंकि वहां 2021 से 2026 तक का पूरा कार्यकाल निकल गया है। अंबाला में 2013 में निगम बनने के बाद मेयर के साथ-साथ निर्धारित समय के भीतर सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव भी हो गया था। दूसरे कार्यकाल में मामला इतना लंबा खिंचा कि चुनाव कराने के लिए तत्कालीन छह पार्षदों जिनमें जसबीर सिंह, फकीर चंद, राजेश मेहता, अमनदीप कौर, राजेश सिंगला इत्यादि को हाई कोर्ट की शरण लेनी पड़ी थी।

अभी अगली प्रक्रिया का इंतजार

दिसंबर 2020 में चुनाव हुए, जनवरी 2021 में शपथ ग्रहण हुआ, लेकिन सीनियर डिप्टी और डिप्टी मेयर के चुनाव आठ दिसंबर 2022 में जाकर हुए। लगभग दो साल तक दोनों कुर्सियां खाली रहीं। इस साल अंबाला में 13 मई को चुनाव परिणाम आए, 28 मई को शपथ ग्रहण होने के बावजूद अगली प्रक्रिया का इंतजार जारी है।

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