कुरुक्षेत्र: शनिवार सुबह 6 बजे मारकंडा दरिया में जलस्तर 14,294 क्यूसिक पहुंचते ही शाहाबाद के गांव कठवा, तंगौर, पट्टी जामड़ा और कलसाना बाढ़ की चपेट में आ गए। कठवा में मुख्य मार्ग नदी में तब्दील हो गया और खेत-खलिहान जलमग्न हो गए। पूर्व सरपंच अधिवक्ता अमरिंदर सिंह ने कहा कि पानी रहने तक शिक्षा, स्वास्थ्य, आवागमन और पशुओं के चारे की समस्या बनी रहेगी। उनके अनुसार कठवा, तंगौर, कलसाना, मुगल माजरा सहित अन्य गांवों की करीब 2,500 एकड़ धान की ताजा पौध बाढ़ की भेंट अब चढ़ गई है।
कलसाना में सुबह 9 बजे तक गलियां और आबादी क्षेत्र पानी में डूब गए। ग्रामीणों ने मिट्टी के कट्टे लगाए, लेकिन पानी घरों में घुस गया। मोनिका, रजत और पंकज ने बताया कि दूषित पेयजल की आपूर्ति होने से दूसरे गांवों से पानी लाना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से पानी निकासी की मांग की। मदनपुर व मोहनपुर को बचाने के लिए बनाए गए बांध को लेकर विवाद भी हुआ। कलसाना के ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि बांध से पानी का रुख उनके गांव की ओर हुआ और उन्होंने बांध पर दो कट लगा दिए।
दूसरी ओर मदनपुर व मोहनपुर के ग्रामीणों ने इसका विरोध करते कहा कि कट लगाने से उनके खेत डूब जाएंगे। थाना प्रभारी जगदीश कुमार ने मौके पर पहुंच कर दोनों पक्षों में सहमति कराई कि जलस्तर घटने पर कट बंद कर दिए जाएंगे। तंगौर में भी खेत जलमग्न हो गए। यादविंदर सिंह राणा ने बताया कि अकेले गांव की करीब 1,700 एकड़ ताजा धान की पौध प्रभावित होगी तथा जलस्तर बढ़ने पर गलियों में भी पानी घुसने की आशंका है। गांव पट्टी जामड़ा में भी निचे हिस्सों में स्थित घरों में पानी घुस गया है, जिसके बाद करीब 7-8 परिवारों ने मारकंडा मंदिर में शेड के निचे शरण ली है।

