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सिर्फ 1 रुपए के शगुन में हुई शादी, न नकद, न गाड़ी, न जेवर

मुलाना: पपलौथा गांव में एक अनोखी और प्रेरणादायक शादी चर्चा का विषय बनी है । इस विवाह में दहेज प्रथा को पूरी तरह नकारते हुए केवल एक रुपये के शगुन में शादी सम्पन्न की गई। जोकि सभी के लिए मिसाल बन गई है। इस पहल को समाज में एक सकारात्मक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। यह शादी गुर्जर समाज में हुई है। जहां आज दहेज के दानवों के कारण कई घर बर्बाद हो रहे हैं और बेटियों के माता-पिता कर्ज के बोझ तले दब जाते हैं, वहीं इस परिवार ने साबित कर दिया कि यदि इच्छाशक्ति हो तो समाज बदला जा सकता है। यह विवाह उन लोगों के लिए एक सीख है जो शानो-शौकत के नाम पर फिजूलखर्ची और दहेज को बढ़ावा देते हैं।

किसान का बैटा है दूल्हा :
बता दें कि यह शादी वीरवार को 23 वर्षीय सचिन कुमार निवासी रानीपुर बिलासपुर जिला यमुनानगर की शादी पपलौथा गावं की रहने वाली 22 वर्षीय महक के साथ एक निजी पैलेस में हुई। सचिन के पिता रमेश कुमार किसान है। उन्होंने बताया कि वो दहेज प्रथा के बिल्कुल खिलाफ है। उन्होंने कहा कि बेटी देने से बड़ा कोई दहेज नहीं होता । उन्होंने बताया कि उनके बेटे सचिन का रिश्ता जब हुआ उन्होंने तभी वधु पक्ष को दहेज के लिए ना बोल दिया था । सगाई भी बिना कुछ लिए की गई । उन्होंने बताया कि विवाह दो परिवारों का मिलन है, न कि व्यापार। जिसके चलते अब शादी में भी शगुन के लिए केवल एक रूपया लेकर शादी की गई है। शादी में किसी प्रकार को कोई गहना व नकदी नहीं ली गई। उन्होंने सभी समाजों से इस तरह की पहल करने की अपील की है।

मिलनियां भी फुलो से हुई :
अक्सर सोने की अंगुठी और नकदी से होने वाली मिलनियां भी इस मिसाल बनी शादी में केवल फूलों से की गई। सभी रिश्तेदारों ने आपस में फुल देकर मिलनी प्रथा को बड़े सरल ढंग से सम्पन्न कराया। इससे पहले दोनों की सगाई भी बिना किसी रुपये के लेन-देन के सम्पन्न हुई थी। यह शादी समाज में दहेज जैसी कुप्रथा के खिलाफ एक मजबूत संदेश देती है। सभी रिश्तेदारों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यदि इसी तरह लोग आगे आएं तो समाज से दहेज प्रथा को खत्म किया जा सकता है।

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