LPG Cylinder Crisis: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और संभावित आपूर्ति बाधाओं के बीच केंद्र सरकार ने कुकिंग गैस को लेकर एक अहम फैसला लिया है। केंद्र सरकार ने घोषणा की है कि जिन उपभोक्ताओं के घरों में पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) की सुविधा उपलब्ध है, उन्हें अब एलपीजी (LPG) सिलेंडर की नई सप्लाई नहीं दी जाएगी। यह कदम देश में बढ़ती गैस की मांग और ‘पैनिक बुकिंग’ को नियंत्रित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
PNG और LPG दोनों कनेक्शन रखने वालों को करना होगा सिलेंडर सरेंडर
पेट्रोलियम मंत्रालय के निर्देश के अनुसार, जिन उपभोक्ताओं के पास PNG कनेक्शन के साथ-साथ LPG सिलेंडर भी है, उन्हें अपना सिलेंडर वापस करना होगा। गैस एजेंसियों और डीलरों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि ऐसे उपभोक्ताओं को आगे से सिलेंडर की आपूर्ति न की जाए।
सरकार का मानना है कि इस निर्णय से उन लोगों के लिए गैस की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकेगी, जिनके पास अभी तक पाइप्ड गैस की सुविधा नहीं है।
युद्ध के कारण बढ़ी गैस को लेकर चिंता
अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव को देखते हुए ऊर्जा आपूर्ति को लेकर आशंकाएं बढ़ी हैं। इसी वजह से कई इलाकों में लोगों ने घबराहट में अधिक संख्या में गैस सिलेंडर बुक करना शुरू कर दिया है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, युद्ध शुरू होने से पहले देश में रोजाना औसतन करीब 55.7 लाख गैस सिलेंडरों की बुकिंग होती थी, जो अब बढ़कर लगभग 75.7 लाख तक पहुंच गई है। कई शहरों में सिलेंडर के लिए लंबी कतारें लगने और कालाबाज़ारी की शिकायतें भी सामने आई हैं।
केंद्र सरकार का दावा- गैस की कमी नहीं
सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे घबराएं नहीं। अधिकारियों का कहना है कि देश में कुकिंग गैस का पर्याप्त भंडार मौजूद है और सप्लाई सामान्य बनाए रखने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है।
करीब 60 लाख उपभोक्ता ऐसे हैं जिनके पास PNG कनेक्शन है। सरकार का मानना है कि यदि ये उपभोक्ता LPG का उपयोग बंद कर दें, तो सिलेंडरों पर दबाव काफी हद तक कम हो जाएगा और इन्हें उन क्षेत्रों में भेजा जा सकेगा जहां पाइपलाइन गैस की सुविधा अभी उपलब्ध नहीं है।
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जमाखोरी और कालाबाज़ारी पर सख्त कार्रवाई
सरकार ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि कुकिंग गैस की जमाखोरी या कालाबाज़ारी करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। स्थानीय प्रशासन और सप्लाई विभाग के अधिकारी स्थिति पर लगातार नज़र बनाए हुए हैं। सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य संकट की स्थिति में संसाधनों का बेहतर प्रबंधन करना और जरूरतमंद उपभोक्ताओं तक गैस की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।

