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हाईकोर्ट ने प्रो. अशोक स्वैन का ओसीआई कार्ड रद्द करने के मामले में केंद्र से मांगा जवाब 

September 11, 2023

हाईकोर्ट ने प्रो. अशोक स्वैन का ओसीआई कार्ड रद्द करने के मामले में केंद्र से मांगा जवाब 

नई दिल्ली: हाईकोर्ट ने सोमवार को स्वीडन स्थित भारतीय मूल के प्रोफेसर अशोक स्वैन की याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें केंद्र द्वारा उनके ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया (ओसीआई) कार्ड को रद्द करने के नए आदेश को चुनौती दी गई है। उच्च न्यायालय द्वारा 10 जुलाई को स्वीडन के उप्साला विश्वविद्यालय में शांति और संघर्ष अनुसंधान विभाग में शांति और संघर्ष अनुसंधान के संकाय सदस्य के ओसीआई कार्ड को रद्द करने के केंद्र के आदेश को रद्द करने के बाद स्वैन ने इस मुद्दे पर फिर से याचिका दायर की।

स्वैन ने कहा कि धाराएं दोहराने के अलावा आदेश में कोई उचित कारण नहीं बताया गया है कि उनका पंजीकरण क्यों हटाया गया है। याचिका न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की पीठ के समक्ष सूचीबद्ध की गई, जिन्होंने केंद्र से जवाब मांगा और मामले को 9 नवंबर को अगली सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया। स्वैन ने तर्क दिया है कि वर्तमान सरकार या इसकी नीतियों पर उनके विचारों के लिए उन्हें परेशान नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा है कि एक विस्तृत आदेश पारित करने के लिए अदालत के विशिष्ट और स्पष्ट निर्देशों के बावजूद, स्वीडन और लातविया में भारतीय दूतावास ने केवल कानून के प्रावधानों को संक्षिप्त करके ‘कठोर तरीके‘ से नया आदेश पारित किया।

याचिका में कहा गया है, ‘‘याचिकाकर्ता की लगभग 78 वर्ष की बीमार मां है, जो मधुमेह, उच्च रक्तचाप और अन्य उम्र से संबंधित बीमारियों सहित विभिन्न बीमारियों से पीड़ित हैं। याचिकाकर्ता इकलौता बेटा है और तीन वर्षों से भारत नहीं आया है। उनके लिए भारत आने और अपनी बीमार मां की देखभाल करने की अत्यधिक आवश्यकता है।’’ स्वैन ने यह भी कहा है कि वह एक जाने-माने अकादमिक और शोधकर्ता हैं और एक शिक्षाविद होने के नाते वह वर्तमान सरकार की कुछ नीतियों का वेिषण और आलोचना करते हैं।

‘‘सरकार की नीतियों पर उनके विचारों के लिए उन्हें परेशान नहीं किया जा सकता। एक विद्वान के रूप में समाज में उनकी भूमिका अपने काम के माध्यम से सरकार की नीतियों पर चर्चा और आलोचना करना है। याचिकाकर्ता को वर्तमान सरकार की राजनीतिक व्यवस्था या उनकी नीतियों पर उसके विचारों के लिए परेशान नहीं किया जा सकता है। याचिका में कहा गया, ‘सरकार की कुछ नीतियों की आलोचना भड़काऊ भाषण या भारत विरोधी गतिविधि नहीं होगी।‘

इससे पहले, उन्होंने अपनी याचिका में उल्लेख किया था कि उनका ओसीआई कार्ड फरवरी 2022 में रद्द कर दिया गया था, क्योंकि उन्होंने वर्तमान भारत सरकार की आलोचना की थी, उन्होंने कहा था कि उन्होंने कोई भड़काऊ भाषण नहीं दिया है। गौरतलब है कि ओसीआई कार्ड भारतीय मूल के विदेशी नागरिक को जारी किया जाता है, जिसे अनिश्चित काल के लिए भारत में रहने और काम करने की अनुमति होती है।

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