शिमला Karcham Wangtoo Power Project: सूबे में व्यवस्था परिवर्तन के मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के स्लोग्न का असर अब धरातल पर दिखाई देने लगा है। खासतौर पर पावर प्रोजेक्टों में रायल्टी को लेकर सरकार के फैसलों से प्रदेश की अर्थव्यवस्था को संबल मिलने की उम्मीद जगी है। कड़छम वांगतू पावर प्रोजेक्ट में 18 फीसद रायल्टी भुगतान के हाईकोर्ट के फैसले के बाद बाकी के प्रोजेक्टों से भी सरकार को करीब 250 करोड़ सालाना रायल्टी मिलने की उम्मीद है। कड़छम वांगतू पावर प्रजेक्ट में निर्धारित अवधि के बाद भी पावर कंपनी 12 फीसद से अधिक रायल्टी का भुगतान सरकार को करने में आनाकानी कर रही थी।
सरकार इस मामले को लेकर अदालत गई। हाई कोर्ट से फैसला सरकार के पक्ष में आने से खजाने को सालाना करीब 150 करोड़ की अतिरिक्त आमदन होने का अनुमान है। अब सरकार 12 साल की अवधि पूरी कर चुके तमाम पावर प्रोजेक्टों से 18 नीति के मुताबिक 18 फीसद रायल्टी वसूल सकती है। इससे खजाने में करीब 250 करोड़ की अतिरिक्त आमदन होगी। कमोवेश यही स्थिति वाइल्ड μलावर हॉल होटल के मामले में है। सरकार ने मजबूती से जंग लड़ी तथा अदालत के फैसले से खजाने में 401 करोड़ की आमदन हुई। इसके अलावा सालाना आय अलग होगी।
हिमाचल, हिमाचलियत और हिमाचली हकों पर आंच नहीं आने देंगे : सुक्खू
उधर, मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा है कि हिमाचल, हिमाचलियत और हिमाचली हकों पर राज्य सरकार आंच नहीं आने देगी। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व भाजपा सरकार ने हिमाचल में निवेश के नाम पर सौदेबाजी की। आईपीआर के फेसबुक पेज पर मुख्यमंत्री की तरफ से इस बात को साझा करते हुए विपक्ष पर निशाना साधा गया है। इसमें कहा गया है कि हिमाचल की पवित्र पर्वतों की धरती में मेहनतकश, ईमानदार, संघर्षशील और स्वाभिमान लोग रहते हैं, जो उनकी असली पहचान है। हिमाचली लोगों में अपने हकों के लिए अडिग जज्बा है , लेकिन पिछली भाजपा सरकार ने निवेश के नाम पर सौदेबाजी की। प्रदेश की जमीनों को औने-पौंने दामों में पूंजीपतियों को सौंप दिया गया। अब हिमाचल के हक की लड़ाई हर मोर्चे पर लडकर जीत दर्ज की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने टटोली वित्त विभाग के अधिकारियों की नब्ज
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने शिमला पहुंचते ही शनिवार को वित्त विभाग के अधिकारियों की नब्ज को टटोला। मौजूदा वित्तीय वर्ष 2025-26 राज्य सरकार के लिए किसी बढ़ी चुनौती से कम नहीं है। सरकार को यह चुनौती आर्थिक मोर्चे पर मिली है। दिसम्बर तक राज्य सरकार के पास ऋण लेने की सीमा 7 हजार करोड़ रुपए निर्धारित की गई है, जिसमें से 6,900 करोड़ रुपए ऋण लिया जा चुका है। इसको देखते हुए मुख्यमंत्री दिल्ली दौरे के दौरान केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मिलकर प्रदेश हित की पैरवी कर चुके हैं। उन्होंने कर्ज के लिए निर्धारित ऋण सीमा में 2 फीसदी बढ़ौतरी की मांग की है, ताकि प्रतिबद्ध देनदारियों का निपटारा करने में परेशानी न आए।

