कुल्लू: भारत की पुरातन कला संस्कृति जहां पहले मंदिरों, बड़े-बड़े किलो में ही देखने को मिलती थी। वही एक लड़की के प्रयासों से इस तरह की कला को आप घर-घर पहुंचने का भी प्रयास किया जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव में 14 साल की लड़की के द्वारा पहली बार इस तरह का स्टार्टअप शुरू किया गया है और वह स्टॉल के माध्यम से पुरातन कला को विभिन्न उत्पादों पर प्रिंट कर सैलानियों तथा स्थानीय लोगों को इसकी जानकारी भी दे रही है।
14 साल की लड़की अलंकृता का उद्देश्य है कि लोग अपनी भारतीय पुरातन कला के बारे में अधिक से अधिक जानकारी रखें और इन्हें रोजमर्रा की वस्तुओं का माध्यम से अपने घरों में प्रयोग करें। ताकि पुरातन कला का अधिक प्रचार प्रसार हो सके। जिला कुल्लू के मुख्यालय ढालपुर मैदान में आयोजित अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव में अलंकृता के द्वारा एक स्टॉल भी लगाया गया है। जिसमें वह अपने साथियों के साथ कॉफी मग, की रिंग, बैग, प्लेट्स, क्रोकरी सहित अन्य उत्पादों पर पुरातन काल को प्रिंट कर लोगों तक पहुंच रही है।
निजी स्कूल में आठवीं कक्षा की छात्रा अलंकृता के द्वारा 1 साल पहले यह प्रयास शुरू किया गया था और अपने जीवन में पहली बार उन्होंने दशहरा उत्सव में यह स्टॉल लगाया है। अलंकृता का कहना है कि इन सभी कला के बारे में जानकारी लेने के लिए वह अधिकतर खुद ऐसे जगह का भ्रमण करती है। जहां मंदिरों, किलो और म्यूजियम में इस तरह की कला का वर्णन किया जाता है। इसके अलावा इंटरनेट के माध्यम से भी वह इन कलाओं के बारे में जानकारी हासिल करती है। वर्तमान समय की बात करें तो यह कला अब काफी सीमित रह गई है और लोगों को इसकी जानकारी भी सही तरीके से नहीं मिल पाती है। अलंकृता ने बताया कि उनके मन में यह ख्याल आया कि अगर वह इस कला की विभिन्न पेंटिंग को रोजमर्रा की वस्तुओं में प्रिंट कर लोगों तक पहुंचाएं। तो इससे लोगों को भी इसके बारे में जानकारी मिलेगी और कला को जानने के प्रति भी उनकी रुचि बढ़ेगी। ऐसे में उन्होंने यह स्टॉल शुरू किया है और आने वाले समय में वह ऑनलाइन माध्यम से भी इसका प्रचार प्रसार करेगी।
छात्रा अलंकृता का कहना है कि भारतीय प्राचीन पेंटिंग कला में वह कांगड़ा पेंटिंग, पिछवाई पेंटिंग और आंध्र प्रदेश की कलमकारी पेंटिंग के प्रिंट रोजमर्रा के वस्तुओं पर प्रिंट कर रहे हैं और लोगों का भी इसमें काफी अच्छा रुझान देखने को मिल रहा है। इसके अलावा कुल्लू शॉल, कुल्लू पट्टी को भी प्रिंट कर सैलानियों को पहुंचा जा रहा है। लोगों का भी इसमें अच्छा रुझान देखने को मिल रहा है। अलंकृता का कहना है कि उनके उत्पादों की कीमत ₹200 से लेकर ₹7000 तक है और आने वाले समय में वह ऑनलाइन माध्यम से भी इन सभी उत्पादों का प्रचार प्रसार करेगी।
वही अलंकृता स्टूडियो में छात्रा अलंकृता का सहयोग करने पहुंची छात्रा कृषा का कहना है कि वह भी आठवीं कक्षा में पढ़ती है और अलंकृता के द्वारा जो भारतीय प्राचीन कला को आम जनता तक पहुंचाने का संकल्प लिया गया है। उसमें उनकी मदद करती है। अलंकृता के द्वारा जो भी उत्पाद तैयार किए जाते हैं। वह भी उसके साथ मिलकर उनकी पैकिंग का कार्य करती है। ऐसे में अलंकृता के द्वारा छोटी सी उम्र में जो प्रयास किया गया है। उससे हम सभी अन्य छोटी उम्र के छात्रों को भी काफी प्रेरणा मिलती है और भविष्य में इस तरह का स्टार्टअप करने में उन्हें भी काफी मदद मिलेगी।
वहीं छात्र अलंकृता का मॉडल बनाने में सहयोग करने वाली अवंतिका का कहना है कि अलंकृता के द्वारा जो भी आइडिया दिए जाते हैं। उसके बाद उस आइडिया का विजन तैयार किया जाता है और कई तरह के प्रोडक्ट तैयार किए जाते हैं। जिसमें मैं उसका सहयोग करती हूं। ऐसे में अलंकृता के द्वारा छोटी उम्र में भारतीय प्राचीन कला को सहेजने का जो प्रयास किया गया है वह सराहनीय है। आने वाले समय में अन्य प्राचीन कला को भी आम जनता तक पहुंचाने का काम किया जाएगा।
📍 Location: Kullu (Kullu)

