Last Updated: September 23, 2026

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Himachal में बंद किए गए 24 स्कूल, यहां देखें पूरी लिस्ट

April 8, 2026

Himachal में बंद किए गए 24 स्कूल, यहां देखें पूरी लिस्ट

हिमाचल डेस्कः प्रदेश सरकार ने शून्य नामांकन वाले 24 और स्कूलों को बंद (डी-नोटिफाई) कर दिया है। इनमें 19 राजकीय प्राथमिक पाठशालाएं (GPS) और 5 राजकीय माध्यमिक स्कूल शामिल हैं। शिक्षा विभाग के अनुसार, मौजूदा शैक्षणिक सत्र में इन स्कूलों में एक भी छात्र ने दाखिला नहीं लिया था। विभाग ने इन्हें बंद करने का प्रस्ताव सरकार को भेजा था, जिसे अब मंजूरी मिल गई है।

तीन साल में 1376 स्कूल बंद

शिक्षा सचिव राकेश कंवर की ओर से इस संबंध में आदेश जारी किए गए हैं। बंद किए गए स्कूल शिमला, सिरमौर, सोलन और लाहौल एवं स्पीति जिलों में स्थित हैं। पिछले तीन वर्षों में राज्य सरकार 1376 स्कूलों को बंद या मर्ज कर चुकी है। इससे पहले 27 मार्च को भी 39 स्कूल बंद किए गए थे। सरकार का कहना है कि जिन स्कूलों में छात्र नहीं हैं, उन्हें चलाना संसाधनों की बर्बादी है।

शिक्षकों और संसाधनों का होगा बेहतर उपयोग

सरकार के अनुसार, इन स्कूलों को बंद कर वहां तैनात शिक्षकों और अन्य संसाधनों को उन स्कूलों में भेजा जाएगा जहां छात्रों की संख्या अधिक है। इसे शिक्षा व्यवस्था के पुनर्गठन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

इन क्षेत्रों के स्कूल प्रभावित

शिमला जिले में सबसे अधिक 15 प्राइमरी और 1 मिडिल स्कूल बंद किए गए हैं। इनमें टिक्कर, कुमारसैन, ठियोग, रामपुर, जुब्बल, चौहारा, नेरवा, कुपवी और सुन्नी जैसे शिक्षा खंड शामिल हैं। सिरमौर जिले के राजगढ़, नारग और सुरला ब्लॉक के स्कूल भी इस सूची में हैं। सोलन जिले के कंडाघाट क्षेत्र का एक प्राइमरी स्कूल बंद किया गया है। वहीं, लाहौल-स्पीति जिले के उदयपुर और केलंग क्षेत्रों के 4 मिडिल स्कूलों को भी बंद किया गया है।

क्या निर्देश दिए गए हैं

जारी अधिसूचना में कहा गया है कि इन स्कूलों में तैनात शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों, भवन, रिकॉर्ड और अन्य संसाधनों का समायोजन पहले से तय दिशा-निर्देशों के अनुसार किया जाएगा। संबंधित अधिकारियों को सभी औपचारिकताएं पूरी कर शीघ्र अनुपालन रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं।

लगातार घट रही है विद्यार्थियों की संख्या

राज्य के सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या लगातार कम हो रही है। वर्ष 2003-04 में कक्षा 1 से 8 तक 9,71,303 छात्र थे, जो अब घटकर 4,29,070 रह गए हैं। यानी 5.42 लाख से अधिक की कमी आई है। सरकार ने प्री-प्राइमरी, अंग्रेजी माध्यम और अब CBSE प्रणाली लागू करने जैसे कदम उठाए हैं। विभाग का दावा है कि इससे भविष्य में छात्रों की संख्या बढ़ेगी।

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