369.82 acres of land sought for the airport. : शिमला। भाजपा के राज्यसभा सदस्य हर्ष महाजन द्वारा राज्यसभा में हिमाचल प्रदेश के हवाई संपर्क, एयरपोर्ट विस्तार और हेलिपोर्ट विकास से जुड़े मुद्दे उठाए जाने पर केंद्र सरकार ने विस्तृत जानकारी दी। केंद्रीय नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने कहा कि प्रदेश में हवाई सुविधाओं के विस्तार के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
कांगड़ा एयरपोर्ट विस्तार भूमि पर अटका
उन्होंने बताया कि कांगड़ा एयरपोर्ट विस्तार की योजना तैयार है, लेकिन इसके लिए आवश्यक 369.82 एकड़ भूमि राज्य सरकार द्वारा अभी तक उपलब्ध नहीं कराई गई है, जबकि UDAN योजना के तहत प्रदेश में हवाई और हेलिपोर्ट नेटवर्क को तेजी से मजबूत किया जा रहा है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार हिमाचल प्रदेश में हवाई संपर्क को सुदृढ़ बनाने और नागरिक उड्डयन ढांचे के विकास के लिए लगातार कार्य कर रही है। केंद्रीय मंत्री ने अपने उत्तर में बताया कि वर्तमान में शिमला हवाई अड्डा दिल्ली और धर्मशाला, कांगड़ा (गगल) हवाई अड्डा दिल्ली, जेवर, चंडीगढ़ और शिमला, जबकि कुल्लू-भुंतर हवाई अड्डा अमृतसर, दिल्ली और जयपुर से जुड़ा हुआ है।
जमीन मिलने पर आगे बढ़ेगा एयरपोर्ट विस्तार
उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश के हवाई संपर्क को बेहतर बनाने के लिए केंद्र सरकार निरंतर प्रयासरत है। मंत्री ने बताया कि एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) ने राज्य सरकार के अनुरोध पर कांगड़ा एयरपोर्ट के विस्तार की योजना तैयार कर ली है, जिसके लिए 369.82 एकड़ अतिरिक्त भूमि की आवश्यकता है। यह भूमि राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध कराई जानी है, लेकिन अभी तक AAI को हस्तांतरित नहीं की गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन नीति-2016 के अनुसार एयरपोर्ट विस्तार के लिए आवश्यक भूमि उपलब्ध कराना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है। केंद्रीय मंत्री ने यह भी बताया कि कुल्लू-भुंतर हवाई अड्डे के विस्तार तथा शिमला एयरपोर्ट के रनवे विस्तार में भौगोलिक परिस्थितियां, कठिन भू-भाग और भूमि संबंधी सीमाएं प्रमुख बाधाएं हैं, जिसके कारण इन परियोजनाओं का विस्तार वर्तमान परिस्थितियों में संभव नहीं है।
UDAN के तहत हिमाचल में 40 हवाई रूट
मंत्री ने कहा कि क्षेत्रीय संपर्क योजना (UDAN) के तहत हिमाचल प्रदेश में अब तक 40 हवाई मार्गों का संचालन शुरू किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त हेलिपोर्ट विकास के संबंध में उन्होंने जानकारी दी कि वर्तमान में रामपुर, मंडी, रिकांगपिओ और संजौली से हेलीकॉप्टर सेवाएं संचालित हो रही हैं। राज्य में हेलिपोर्ट अवसंरचना के विकास के लिए ₹51.11 करोड़ स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से ₹37.31 करोड़ की राशि अब तक व्यय की जा चुकी है। केंद्रीय मंत्री ने यह भी बताया कि UDAN योजना के अगले चरण के अंतर्गत वर्ष 2026-27 से 2035-36 तक पर्वतीय, उत्तर-पूर्वी और आकांक्षी क्षेत्रों में 200 हेलिपोर्ट विकसित करने के लिए ₹3,661 करोड़ का प्रावधान किया गया है।