शिमला: सूबे में पहली जून से 500 मिली की प्लास्टिक की पामनी की बोतलों पर पाबंदी रहेगी। सरकारी अदारों, बोर्डो व निगमों के कार्यालयों में प्लास्टिक की पानी की बोतलों में पानी व पेय पदार्थ मुहैय्या नहीं करवाया जाएगा। पर्यटन विकास निगम के होटलों में भी प्लास्टिक की पानी की बोतलों पर पाबंदी रहेगी। सोमवार को पॉलीथिन टेरेप्थैलेट (पीईटी) विशेषता वाली पानी की बोतलों पर पाबंदी को लेकर आयोजित समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना ने यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश जीव अनाशित कूड़ा-कचरा अधिनियम और हिमाचल प्रदेश जीव अनाशित कूड़ा-कचरा नियंत्रण संशोधन अधिनियम के तहत प्रदेश में प्लास्टिक से पर्यावरण को होने वाले नुकसान के दृष्टिगत यह निर्णय लिया गया है।
उन्होंने इस दिशा में सभी संबंधित विभागों से उठाए गए कदमों की विस्तृत जानकारी हासिल की तथा पर्यावरण संरक्षण की दिशा में लिए गए सरकार के इस महत्वपूर्ण कदम की सख्ती से अनुपालना सुनिश्चित बनाने के भी निर्देश दिये। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को इसकेदृष्टिगत व्यापक जन जागरूकता बढ़ाने के भी निर्देश दिए, ताकि लोगों को पर्यावरण हितैषी विकल्पों की जानकारी दी जा सके। मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना ने प्रदेश में सार्वजनिक एवं निजी परिवहन व टैक्सियों में गार्बेज बिन रखने की अनिवार्यता को लेकर आयोजित बैठक की अध्यक्षता की। प्रदेश में प्लास्टिक कचरा प्रबंधन एवं पर्यावरण संरक्षण के लिए राज्य सरकार ने सभी प्रकार के पर्यटक वाहनों, सार्वजनिक एवं निजी परिवहन और टैक्सी सेवाओं में गार्बेज बिन रखना अनिवार्य किया है। बैठक में हिमाचल पथ परिवहन निगम के अधिकारियों ने अवगत करवाया कि सभी सरकारी बसों में गार्बेज बिन को स्थापित कर दिया गया है।
बस स्टैंड व कर्मशालाओं में बसों की साफ सफाई के दौरान भी प्लास्टिक कचरे को संग्रहित करने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं। इसके अलावा, एचआरटीसी ढाबों में भी प्लास्टिक कचरे के संग्रहण के लिए आवश्यक कदम उठाए गए हैं। उन्होंने परिवहन विभाग के अधिकारियों को भी प्रदेश में आने वाले पर्यटक वाहनों सहित निजी परिवहन व टैक्सियों में गार्बेज बिन को लेकर जारी दिशानिर्देशों की कड़ाई से अनुपालना सुनिश्चित बनाने के भी निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने टैक्सी स्टैंड के साथ-साथ शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में प्लास्टिक कचरे के संग्रहण की दिशा में परिवहन, ग्रामीण विकास तथा शहरी विकास विभाग को आवश्यक कदम उठाने को कहा, ताकि निर्धारित लक्ष्यों की पूर्ति सुनिश्चित हो सके। प्रबोध सक्सेना ने पर्यावरण, विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व के Rियान्वयन की वर्तमान स्थिति तथा विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श करने के लिए आयोजित बैठक की भी अध्यक्षता की।
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