नाहन : सिरमौर में अब तक स्वाइन फ्लू के 8 मामले पॉजिटिव पाए जाने से हड़कंप मच गया। लेकिन राहत की बात यह है कि जिले में पिछले दो दिनों से कोई नया मामला सामने नही आया है। हिमाचल प्रदेश के सिरमौर सहित विभिन्न जिलों में स्वाइन फ्लू और इन्फ्लूएंजा के बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह अलर्ट पर है। मानसून और बदलते मौसम के कारण उत्तर भारत के कई हिस्सों सहित राज्य में इन्फ्लूएंजा जैसी बीमारियों और गंभीर तीव्र श्वसन संक्रमण के मामलों की निगरानी बढ़ा दी गई है।
राज्य के सभी मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि बुखार, तेज खांसी और जुकाम जैसे संदिग्ध लक्षण दिखने पर तुरंत मरीजों के सैंपल जांच के लिए भेजे जाएं। जिला अस्पताल के सूत्रों के अनुसार जिन लोगों में स्वाइन फ्लू के लक्षण पाए गए थे, वे सभी रिकवर हो चुके है। मगर स्क्रब टाइफाइस के 30 मामले सामने आ चुके है। जबकि इन्फ्लूएंजा (आईएलआई) के लक्षण 5 लोगों में पाए गए हैं।
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि स्थित नियंत्रण में है तथा एक आद को छोड़कर स्वाइन फ्लू , स्क्रब टाइफस और डेंगू आदि से ग्रस्त किसी भी मरीज में इन बीमारियों के कोई गंभीर लक्षण नहीं पाए गए हैं। ऐसे में स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि बरसात के मौसम में स्वाइन फ्लू, स्क्रब टाइफस और डेंगू जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। थोड़ी सी सावधानी से हम इनसे बच सकते हैं। स्क्रब टाइफस से बचने के लिए, खेतों में काम करते समय पूरी बाजू के कपड़े और जूते जरूर पहनें।
घर के आसपास झाड़ियों की सफाई रखें। डेंगू से बचने के लिए, अपने घर के कूलर, गमलों और फ्रिज की ट्रे में पानी जमा ना होने दें। पूरी बाजू के कपड़े पहनें और मच्छरदानी का प्रयोग करें। जबकि स्वाइन फ्लू से बचने के लिए, भीड़ में मास्क पहनें, खांसते और छींकते समय रुमाल का प्रयोग करें और हाथों को बार-बार साबुन से धोएं।

