तपोवन : हिमाचल प्रदेश विधानसभा का शीतकालीन सत्र हर साल की तरह इस बार भी धर्मशाला के तपोवन स्थित परिसर में शुरू हो चुका है। 26 नवंबर 2025 से आरंभ हुआ यह सत्र 5 दिसंबर 2025 तक चलेगा। यह 14वीं विधानसभा का 10वां सत्र है, जिसकी शुरूआत 26 नवंबर को सुबह 11 बजे राष्ट्रगान और शोक संवेदनाओं के साथ हुई। कुल 8 बैठकें इस सत्र के दौरान आयोजित की जाएंगी। गौरतलब है कि तपोवन, धर्मशाला विधानसभा क्षेत्र का हिस्सा है, जहाँ 25 दिसंबर 2006 को विधानसभा भवन का उद्घाटन किया गया था। शिमला राजधानी होने के बावजूद राज्य सरकार हर साल शीतकालीन सत्र के लिए तपोवन परिसर का उपयोग करती है।
लगभग बीस वर्षों से चल रही इस परंपरा पर सरकार करोड़ों रुपये खर्च करती है । सत्र आयोजन से लेकर भवन की रंग-रोवन तक सब होता है। लेकिन इतने बड़े खर्च के बावजूद सबसे बुनियादी सुविधा बाहर बैठने की व्यवस्था आज भी नदारद है। सत्र के दौरान प्रदेशभर के बड़े स्तर के प्रशासनिक अधिकारी, आईपीएस, एचएएस समेत जिला प्रशासन के अधिकारी पूरे दिन यहीं मौजूद रहते हैं, मगर उन्हें नीचे मैदान में बैठना पड़ता है। हैरानी की बात है कि जहां आज हर पंचायत में लाखों रुपये की लागत से बेंच और बैठने की सुविधाएं लगाई जा रही हैं, वहीं प्रदेश की विधानसभा परिसर जहाँ लाखों की भीड़ आती है वहां बाहर बैठने के लिए न तो बेंच हैं, न कुर्सियां।
दिव्यांगजन भी किसी समस्या को लेकर पहुंचते हैं तो उन्हें भी मजबूरी में मैदान में ही बैठना पड़ता है। ड्यूटी के लिए अधिकारी कर्मी भी दिनभर खड़े खड़े ही थक जाते हैं। हर विधानसभा सत्र के दौरान मंत्रियों, विधायकों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आने वाले चालकों तथा अन्य सहयोगी कर्मचारियों को विधानसभा परिसर में बैठने की उचित व्यवस्था न होने की समस्या लगातार बनी हुई है। इन लोगों के लिए बैंच लगवाने और पीने के पानी की सुविधा सुनिश्चित करने की मांग लंबे समय से उठाई जा रही है। सूत्रों के अनुसार, इस बाबत कई बार तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष और मुख्यमंत्री सहित संबंधित मंत्रियों से मुलाकात कर व्यवस्था दुरुस्त कराने का आग्रह किया गया।
इसके बावजूद आज तक किसी भी स्तर पर ठोस कदम नहीं उठाए गए, जिससे कर्मचारियों में नाराजगी देखी जा रही है। सत्र के दौरान जहां जनप्रतिनिधियों के कामकाज के लिए तमाम सुविधाएं उपलब्ध होती हैं, वहीं उनके साथ आने वाले चालकों और सहयोगी कर्मचारियों को खुले में खड़े रहने और पानी के लिए भटकने की मजबूरी ङोलनी पड़ती है। लगातार की जा रही मांगों के बावजूद समाधान न मिलने से यह मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। दबी जुबान के संबंधित कर्मचारियों ने प्रशासन से जल्द कार्रवाई कर मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि उन्हें भी सम्मानजनक और सुविधाजनक कार्य वातावरण मिल सके। यहां तक कि स्थानीय पँचायत भी यहां बैंच तक स्थापित नहीं करवा पाई।
स्थानीय लोगों और आगंतुकों का कहना है कि इतने बड़े और प्रतिष्ठित परिसर में बुनियादी सुविधाओं की कमी चिंता पैदा करती है और सरकार को इस पर तत्काल ध्यान देना चाहिए। वहीं अब तो सरकार ने इस परिसर को सैलानियों के लिए खोलने का प्रस्ताव तैयार किया है। लेकिन विस परिसर के बाहर न तो कोई पाकिर्ंग की व्यवस्था पिछले 20 सालों में हुई है न हीं अंदर परिसर में खुले में बैठने की कोई व्यवस्था हो पाई है।
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