Last Updated: November 6, 2026

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KNH को IGMC शिफ्ट करने के विरोध में 15 सितंबर को सचिवालय पर गरजेगी AIDWA, सरकार के खिलाफ उग्र आंदोलन की चेतावनी

September 12, 2026

KNH को IGMC शिफ्ट करने के विरोध में 15 सितंबर को सचिवालय पर गरजेगी AIDWA, सरकार के खिलाफ उग्र आंदोलन की चेतावनी

शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला स्थित ऐतिहासिक कमला नेहरू महिला एवं शिशु अस्पताल (KNH) को इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (IGMC) में शिफ्ट किए जाने के निर्णय पर विवाद गहरा गया है। इस फैसले को वापस लेने की मांग को लेकर अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति (AIDWA) ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। समिति की पदाधिकारियों का आरोप है कि सरकार एक रोबोटिक सर्जरी की आड़ में बसे-बसाए ऐतिहासिक अस्पताल को बर्बाद करने पर तुली है। इस निर्णय के विरोध में महिला समिति 15 सितंबर को टालेण्ड से सचिवालय तक विरोध मार्च निकालकर सरकार के खिलाफ हल्ला बोलेगी। समिति ने इस मुहिम में आम जनता से भी बड़ी संख्या में जुड़ने की अपील की है।

​जनवादी महिला समिति की सदस्य इस फैसले के विरोध में सड़क से लेकर न्यायालय तक की लड़ाई लड़ रही हैं। यह मामला फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है। KNH को IGMC में शिफ्ट करने का कड़ा विरोध जताते हुए समिति की पदाधिकारियों ने पत्रकार वार्ता में कहा कि IGMC में स्वास्थ्य सुविधाओं का भारी अभाव है। जो इलाज और दवाएं पहले KNH में निःशुल्क उपलब्ध होती थीं, अब उनके लिए मरीजों को पैसे चुकाने पड़ रहे हैं।

​इसके साथ ही, KNH की वर्षों पुरानी लिगेसी भी अब खतरे में पड़ गई है। IGMC पहले से ही अत्यधिक ओवर-क्राउडेड है, ऐसे में KNH के विभागों को वहां शिफ्ट करना किसी भी दृष्टिकोण से तर्कसंगत नहीं है। इस फैसले से प्रशिक्षु डॉक्टरों की पढ़ाई और प्रशिक्षण भी सीधे तौर पर प्रभावित हो रहा है। महिला समिति के सदस्य गांव-गांव जाकर लोगों से संवाद कर रहे हैं और आम जनता भी सरकार के इस फैसले से बेहद असंतुष्ट है।

पत्रकार वार्ता के दौरान AIDWA की राज्य अध्यक्ष रंजना जरेट, सचिव फालमा चौहान और सचिवालय सदस्य सुनिधि चौहान ने सरकार की नीतियों पर तीखे सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि केवल एक रोबोटिक सर्जरी की सुविधा के लिए इस ऐतिहासिक अस्पताल को नष्ट किया जा रहा है। ​उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश के इतिहास में आज तक जितने भी मुख्यमंत्री रहे, उन्होंने KNH की बेहतरी और सुविधाओं के विस्तार के लिए कदम उठाए, लेकिन यह पहली सरकार है जो इस अस्पताल को बांटने और खत्म करने का काम कर रही है। नेताओं ने स्पष्ट किया कि अस्पताल को किसी भी कीमत पर बर्बाद नहीं होने दिया जाएगा।

इसके साथ ही, शिफ्टिंग का निर्णय लेने के लिए गठित कमेटी की नीयत पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि समिति में शामिल अस्पताल की प्रिंसिपल, गायनी HOD और DME सभी एक्सटेंशन पर हैं और केवल अपना निजी लाभ देख रहे हैं, जबकि जनहित की पूरी तरह अनदेखी की जा रही है। IGMC का माहौल किसी भी स्थिति में गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं के इलाज के लिए उपयुक्त नहीं है।

समिति की सचिव फालमा चौहान ने बताया कि KNH को बचाने के लिए चलाए गए हस्ताक्षर अभियान को जनता का भरपूर समर्थन मिला है। इस अभियान के दौरान 1 लाख से अधिक लोगों ने हस्ताक्षर कर अपना विरोध दर्ज कराया है। इन हस्ताक्षरों को जल्द ही ज्ञापन के साथ सरकार को सौंपा जाएगा। उन्होंने आम जनता का आभार व्यक्त करते हुए 15 सितंबर को आयोजित सचिवालय मार्च में भारी संख्या में पहुंचने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि सरकार महिलाओं को बेहतर सुविधाएं देना चाहती है, तो वे सभी सुविधाएं KNH परिसर के भीतर ही उपलब्ध करवाई जाएं।

सचिवालय सदस्य सुनिधि चौहान ने 16 सितंबर 2025 को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक का हवाला देते हुए बताया कि उस दौरान केवल IGMC में गायनी की रोबोटिक सर्जरी के लिए 50 बैड आवंटित करने पर सहमति बनी थी। लेकिन इसके विपरीत, रातों-रात पूरे गायनी वार्ड को ही IGMC शिफ्ट कर दिया गया। चंद लोगों ने अपने निजी स्वार्थ के लिए यह निर्णय थोपा है। उन्होंने कहा कि IGMC में मरीजों को भटकना पड़ रहा है और कोई भी इलाज मुफ्त नहीं मिल रहा है। सरकार का यह कदम महिलाओं के स्वास्थ्य अधिकारों पर सीधा हमला है।

📍 Location: शिमला (शिमला)

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