Last Updated: October 4, 2026

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मानदेय बढ़ोतरी लागू न होने पर भड़का आंगनबाड़ी कर्मियों का रोष

October 4, 2026

मानदेय बढ़ोतरी लागू न होने पर भड़का आंगनबाड़ी कर्मियों का रोष

Anganwadi Workers to Protest Across Himachal : शिमला। बजट घोषणा के करीब छह माह बाद भी आंगनबाड़ी वर्कर्स एवं हेल्पर्स के मानदेय में 1,000 रुपये मासिक बढ़ोतरी लागू न होने से कर्मियों में नाराजगी बढ़ गई है। सीटू से संबंधित आंगनबाड़ी वर्कर्स एवं हेल्पर्स यूनियन ने आंदोलन तेज करने का फैसला लिया है।

यूनियन 23 अक्टूबर को प्रदेशभर में जिला और परियोजना स्तर पर प्रदर्शन करेगी, जबकि 1 और 2 दिसंबर को दिल्ली में होने वाले महापड़ाव में हिमाचल से करीब 1,000 आंगनबाड़ी कर्मी हिस्सा लेंगे। यूनियन ने बढ़ी हुई राशि का एरियर देने समेत नियमित कर्मचारी का दर्जा, सम्मानजनक वेतन, पेंशन, ग्रेच्युटी और सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं देने की मांग उठाई है।

सीटू से संबंधित आंगनबाड़ी वर्कर्स एवं हेल्पर्स यूनियन ने अब सरकार के खिलाफ आंदोलन तेज करने का फैसला लिया है। यूनियन 23 अक्तूबर को पूरे प्रदेश में जिला और परियोजना स्तर पर प्रदर्शन करेगी। वहीं, 1 और 2 दिसंबर को दिल्ली में होने वाले महापड़ाव में हिमाचल से 1,000 आंगनबाड़ी वर्कर्स एवं हेल्पर्स हिस्सा लेंगे। ज्योति बासु भवन, हमीरपुर में यूनियन की प्रदेशाध्यक्ष नीलम जसवाल की अध्यक्षता में हुई राज्य कमेटी की बैठक में यह निर्णय लिया गया।

बैठक को सीटू राष्ट्रीय सचिव डॉ. कश्मीर ठाकुर, प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा, यूनियन अध्यक्ष नीलम जसवाल और महासचिव वीना शर्मा ने संबोधित किया। बैठक में कहा गया कि मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने बजट में आंगनबाड़ी वर्कर्स एवं हेल्पर्स के मानदेय में 1,000 रुपये प्रतिमाह बढ़ोतरी की घोषणा की थी, लेकिन करीब छह माह बीतने के बावजूद इसे लागू नहीं किया गया है। यूनियन ने सरकार से मांग की कि घोषणा को तत्काल लागू करते हुए बढ़ी हुई राशि का एरियर भी कर्मियों को दिया जाए।

यूनियन नेताओं ने कहा कि आंगनबाड़ी वर्कर्स और हेल्पर्स महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं को जमीनी स्तर पर लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। बच्चों के पोषण, प्रारंभिक शिक्षा, स्वास्थ्य, टीकाकरण तथा महिलाओं और बच्चों से जुड़ी विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन में उनका अहम योगदान है। इसके बावजूद उन्हें नियमित कर्मचारी का दर्जा, सम्मानजनक वेतन और पर्याप्त सामाजिक सुरक्षा नहीं मिल रही है।

बैठक में 8 जून को शिमला में किए गए प्रदर्शन और 20 अगस्त को निदेशक महिला एवं बाल विकास विभाग को सौंपे गए मांग-पत्र पर भी चर्चा हुई। यूनियन ने आरोप लगाया कि लंबे समय से मांगें उठाने के बावजूद कई मामलों में अभी तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। यूनियन की प्रमुख मांगों में 1,000 रुपये की बजट घोषणा को तत्काल लागू करना, आंगनबाड़ी वर्कर्स एवं हेल्पर्स को नियमित कर्मचारी का दर्जा देना, सम्मानजनक वेतन, सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन, ग्रेच्युटी और अन्य सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं देना शामिल है। इसके अलावा आंगनबाड़ी केंद्रों में पर्याप्त पोषण सामग्री, मूलभूत सुविधाएं और सुरक्षित कार्य परिस्थितियां उपलब्ध करवाने की भी मांग की गई।

बैठक में कर्मियों से अतिरिक्त कार्य करवाए जाने पर भी चिंता जताई गई। यूनियन ने कहा कि निर्धारित कार्यों के अलावा अतिरिक्त जिम्मेदारियां देने की स्थिति में उचित व्यवस्था और पारिश्रमिक सुनिश्चित किया जाना चाहिए। सीटू नेताओं ने कहा कि आंगनबाड़ी कर्मियों का मुद्दा केवल मानदेय तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की महिला एवं बाल कल्याण व्यवस्था से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। उन्होंने केंद्र और प्रदेश सरकार से लंबित मांगों को प्राथमिकता के आधार पर हल करने की मांग की। यूनियन महासचिव वीना शर्मा ने कहा कि 23 अक्तूबर के प्रदर्शन को सफल बनाने के लिए जिला, परियोजना और केंद्र स्तर पर व्यापक अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने प्रदेश की सभी आंगनबाड़ी वर्कर्स एवं हेल्पर्स से प्रदर्शन और दिल्ली महापड़ाव में बढ़-चढ़कर भाग लेने का आह्वान किया।

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