हमीरपुर : पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं सांसद अनुराग ठाकुर ने लोकसभा में नियम 377 के तहत एक महत्वपूर्ण मुद्दा उठाते हुए केंद्र सरकार से गोविंद सागर (भाखड़ा बांध) और महाराणा प्रताप सागर (पौंग बांध) जलाशयों के लिए समयबद्ध और समग्र एक्वाकल्चर विकास योजना तैयार करने की मांग की है। उन्होंने बताया कि इन दोनों जलाशयों का कुल जल क्षेत्र लगभग 42,000 हैक्टेयर है, जो ऊना, हमीरपुर, बिलासपुर और कांगड़ा जिलों में मत्स्य आधारित आर्थिक विकास की अपार संभावनाएं प्रदान करता है।
उन्होंने कहा कि हमीरपुर संसदीय क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति देश के दो बड़े मानव निर्मित जलाशयों के बीच होने के कारण विशेष महत्व रखती है। यह क्षेत्र ब्लू रिवोल्यूशन और सतत मत्स्य विकास के लक्ष्यों को साकार करने में अहम भूमिका निभा सकता है। उन्होंने आधुनिक फिश लैंडिंग केंद्र, आइस प्लांट, ट्राउट और कार्प हैचरी, केज कल्चर विस्तार तथा सीधे विपणन तंत्र को शामिल करते हुए एक सुनियोजित योजना बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
सांसद ने केंद्र सरकार से ब्लू रिवोल्यूशन योजना के तहत बुनियादी ढांचे के विकास, फिश सीड स्टॉकिंग, मछुआरों के कल्याण तथा राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड द्वारा रेसवे यूनिट, बीज उत्पादन, पोस्ट-हार्वेस्ट सुविधाएं और कौशल विकास कार्यक्र मों के लिए विशेष परियोजनाएं शुरू करने का आग्रह किया। उन्होंने बताया कि 24 मार्च 2026 को लोकसभा में पूछे गए एक अतारांकित प्रश्न के उत्तर में केंद्र सरकार ने जानकारी दी है कि प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत हिमाचल प्रदेश के लिए 155.48 करोड़ रुपए की परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं, जिनमें केंद्र का अंश 79.47 करोड़ है।
हमीरपुर संसदीय क्षेत्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि के रूप में जिला ऊना के गगरेट में 5.17 करोड़ की लागत से अत्याधुनिक मत्स्य प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना को मंजूरी मिली है। यह केंद्र मछुआरों, मत्स्य पालकों और उद्यमियों को आधुनिक तकनीकों और सर्वोत्तम प्रथाओं का प्रशिक्षण देगा, जिससे हजारों परिवारों को लाभ मिलने की उम्मीद है।

