बैठक में अधिनियम के प्रावधानों के तहत आने वाले दिव्यांगजनों के अधिकारों, संरक्षण, देखभाल एवं कल्याण से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। इसके अतिरिक्त पूर्व बैठक में लिए गए निर्णयों की अनुपालना रिपोर्ट की समीक्षा करने के साथ-साथ नए मामलों में कानूनी संरक्षक नियुक्त करने संबंधी प्रस्तावों पर भी गहनता से विचार-विमर्श किया गया। उपायुक्त ने कहा कि दिव्यांगजनों को सुरक्षित एवं सम्मानजनक जीवन प्रदान करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि दिव्यांगजनों के संरक्षण एवं कल्याण के लिए निर्धारित व्यवस्थाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए तथा उनके अधिकारों के प्रति किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरती जाए। बैठक में जानकारी दी गई कि राष्ट्रीय न्यास अधिनियम, 1999 के अंतर्गत बौद्धिक दिव्यांगता, ऑटिज्म, सेरेब्रल पाल्सी तथा बहु-दिव्यांगता से संबंधित ऐसे दिव्यांगजन, जिनकी आयु 18 वर्ष से अधिक है, उनके संरक्षण एवं देखभाल के उद्देश्य से कानूनी संरक्षक नियुक्त करने का प्रावधान है। कानूनी संरक्षक के रूप में माता-पिता, भाई-बहन, अन्य उपयुक्त परिजन अथवा गैर-सरकारी संस्था (NGO) को नियुक्त किया जा सकता है।
वर्तमान में जिला शिमला में कुल 117 दिव्यांगजनों के लिए कानूनी संरक्षक नियुक्त किए गए हैं। तहसीलवार विवरण के अनुसार शिमला शहरी में 14, शिमला ग्रामीण में 24, जुब्बल में 5, कुमारसैन में 7, कोटखाई में 9, रोहड़ू में 7, चौपाल में 11, रामपुर में 4, ठियोग में 16, सुन्नी में 9, चिड़गांव में 5 तथा ननखड़ी में 6 कानूनी संरक्षक नियुक्त किए गए हैं। बैठक में बताया गया कि उक्त में से 02 कानूनी संरक्षकों की मृत्यु हो चुकी है। उपायुक्त ने निर्देश दिए कि नियुक्त कानूनी संरक्षकों की कार्यप्रणाली एवं उनके द्वारा दिव्यांगजनों को उपलब्ध करवाई जा रही देखभाल की नियमित निगरानी की जाए, ताकि प्रत्येक पात्र दिव्यांगजन को उचित संरक्षण एवं आवश्यक सुविधाएं मिलती रहें।
पिछली बैठक में लिए गए निर्णयों की अनुपालना की समीक्षा करते हुए बताया गया कि सभी तहसील कल्याण अधिकारियों द्वारा नियुक्त कानूनी संरक्षकों के माध्यम से दिव्यांगजनों की देखभाल एवं सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है। संबंधित अधिकारियों द्वारा दिव्यांगजनों के आवास पर जाकर उनके परिजनों एवं कानूनी संरक्षकों से बातचीत की गई तथा उनकी वर्तमान स्थिति का सत्यापन भी किया गया है। समीक्षा के दौरान यह भी सामने आया कि नियुक्त कानूनी संरक्षकों द्वारा दिव्यांगजनों की उचित देखभाल की जा रही है तथा उनके कल्याण एवं सुरक्षा के संबंध में किसी प्रकार की विशेष शिकायत अथवा गंभीर समस्या प्राप्त नहीं हुई है।
उपायुक्त ने निर्देश दिए कि तहसील कल्याण अधिकारी समय-समय पर दिव्यांगजनों के घर जाकर उनकी स्थिति का जायजा लेते रहे और यह सुनिश्चित करें कि उन्हें आवश्यक देखभाल, सुरक्षा एवं सहयोग निरंतर प्राप्त हो रहा है। उपायुक्त ने कहा कि यदि किसी दिव्यांगजन को स्वास्थ्य संबंधी कोई समस्या आती है, तो उसे निकटतम स्वास्थ्य संस्थान में समयबद्ध उपचार उपलब्ध करवाना सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि दिव्यांगजनों की स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताओं को प्राथमिकता दी जाए तथा किसी भी गंभीर स्थिति में तत्काल आवश्यक चिकित्सा सहायता उपलब्ध करवाने के लिए समन्वय स्थापित किया जाए।
उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि यदि किसी नियुक्त कानूनी संरक्षक की मृत्यु हो जाती है, तो संबंधित दिव्यांगजन के हितों को ध्यान में रखते हुए नए कानूनी संरक्षक की नियुक्ति की प्रक्रिया बिना विलंब शुरू की जाए, ताकि उनकी देखभाल एवं संरक्षण की व्यवस्था प्रभावित न हो। बैठक में समिति के समक्ष तीन नए मामलों में कानूनी संरक्षक नियुक्त करने संबंधी प्रस्ताव प्रस्तुत किए गए। इनमें तहसील रोहड़ू, शिमला ग्रामीण तथा कुमारसैन से संबंधित मामले शामिल रहे जिन्हे बैठक में मंजूरी दी गई।

