Approval for sponsorship and foster care for children : कुल्लू। जिला में जरूरतमंद और संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। एडीएम सुरजीत सिंह राठौर की अध्यक्षता में हुई स्पॉन्सरशिप एवं फोस्टर केयर अनुमोदन समिति की बैठक में विभिन्न विकास खंडों से प्राप्त 61 नए मामलों को मंजूरी दी गई। इसके साथ ही पहले से चल रहे 1097 मामलों की समीक्षा कर पात्र बच्चों को आर्थिक सहायता लगातार जारी रखने के निर्देश दिए गए।
बैठक के दौरान समिति के समक्ष विभिन्न विकास खंडों से प्राप्त 61 नए मामलों को मंजूरी प्रदान की गई। इनमें आनी से 22, निरमंड से 19, कुल्लू से 10, कटराईं से 9 तथा बंजार से 1 मामला शामिल था। इसके अतिरिक्त, बैठक में पहले से चल रहे 1097 मामलों की प्रगति की भी विस्तृत समीक्षा की गई, ताकि पात्र बच्चों को मिल रही वित्तीय सहायता निरंतर जारी रह सके। बैठक में बताया गया कि स्पॉन्सरशिप योजना के तहत ऐसे बच्चों को आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है, जो किसी संकट की स्थिति के कारण अपने जैविक माता-पिता, एकल माता-पिता अथवा विस्तारित परिवार जैसे नाना-नानी या दादा-दादी के साथ रह रहे हैं।
पात्र बच्चों को 4,000 रुपये प्रतिमाह की सहायता 18 वर्ष की आयु तक प्रदान की जाती है। यह सहायता आर्थिक रूप से अत्यंत कमजोर परिवारों, गंभीर बीमारी से पीड़ित माता-पिता वाले बच्चों तथा अकेली माता के साथ रह रहे बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करने में सहायक है। राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाती है। फोस्टर केयर योजना के तहत उन बच्चों को सहायता प्रदान की जाती है जो अपने जैविक परिवार से दूर हैं और जिन्हें बाल कल्याण समिति द्वारा किसी योग्य गैर-रिश्तेदार परिवार की देखरेख में सौंपा गया है।
ऐसे बच्चों के पालन-पोषण के लिए फोस्टर माता-पिता को 4,000 रुपये प्रतिमाह की सहायता दी जाती है। यह सहायता बच्चे के 18 वर्ष की आयु पूरी करने अथवा उसके जैविक परिवार के उसे वापस लेने की स्थिति में सक्षम होने तक प्रदान की जाती है। एडीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रभावित बच्चों और उनके परिवारों को स्वास्थ्य, शिक्षा एवं संपूर्ण विकास से जुड़ी आवश्यकताओं के लिए पूरक सहायता समयबद्ध तरीके से उपलब्ध करवाई जाए। उन्होंने कहा कि जिले में कोई भी पात्र एवं जरूरतमंद बच्चा इन योजनाओं के लाभ से वंचित नहीं रहना चाहिए।

