Site icon Dainik Savera Times

एसआईआर पर कांग्रेस को राकेश जमवाल की चुनौती, बोले—आरोपों के सबूत दें

BJP Challenges Congress to Prove SIR Allegations : शिमला। मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर हिमाचल प्रदेश में भाजपा और कांग्रेस के बीच सियासी जुबानी जंग तेज हो गई है। भाजपा प्रदेश मुख्य प्रवक्ता एवं विधायक राकेश जमवाल ने कांग्रेस पर जनता के बीच भ्रम फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि चुनावी प्रक्रिया पर सवाल तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर उठाए जाने चाहिए।

उन्होंने कहा कि प्रारूप मतदाता सूची में नामों के चिह्नित होने या शामिल नहीं होने का आंकड़ा सीधे मताधिकार से वंचित किए जाने का प्रमाण नहीं है। जमवाल ने मांग की कि कांग्रेस गलत तरीके से हटाए गए पात्र मतदाताओं के नामों और संबंधित मामलों के ठोस सबूत जनता के सामने रखे। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस एसआईआर को लेकर जनता के बीच भ्रम और आशंकाएं पैदा कर रही है, जबकि मतदाता सूचियों की शुद्धता सुनिश्चित करना लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। जमवाल ने कहा कि प्रसिद्ध अर्थशास्त्री एवं लेखक सुरजीत एस. भल्ला ने अंग्रेजी दैनिक द इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित अपने विश्लेषण में एसआईआर से जुड़े आंकड़ों और दावों पर महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं। उनके अनुसार वर्ष 2024 में ही लगभग 7.3 करोड़ युवा मतदाता पंजीकृत नहीं थे।

यह आंकड़ा दर्शाता है कि मतदाता पंजीकरण की प्रक्रिया में पहले से मौजूद कमियों को भी गंभीरता से समझने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि प्रारूप मतदाता सूचियों में लगभग 13 करोड़ नाम चिह्नित होने या शामिल नहीं होने के दावे को सीधे तौर पर इतने ही नागरिकों के मताधिकार से वंचित होने का प्रमाण बताना उचित नहीं है। प्रारूप सूची और अंतिम मतदाता सूची में स्पष्ट अंतर होता है। इस दौरान दावे, आपत्तियां, दस्तावेजों का सत्यापन और नियमानुसार सुधार की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण होती है। राकेश जमवाल ने कहा कि कांग्रेस को स्पष्ट करना चाहिए कि एसआईआर की प्रक्रिया में वास्तव में कितने पात्र मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटाए गए, ऐसे मामलों के प्रमाण क्या हैं और संबंधित शिकायतों पर क्या कार्रवाई हुई।

उन्होंने कहा कि किसी भी पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची से गलत तरीके से हटना गंभीर विषय है और ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच तथा नियमानुसार सुधार सुनिश्चित होना चाहिए।जमवाल ने आरोप लगाया कि कांग्रेस चुनाव आयोग, ईवीएम और मतदाता सूचियों जैसे विषयों पर लगातार राजनीतिक विवाद खड़े कर रही है। उन्होंने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं के निर्णयों पर सवाल उठाना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन आरोपों की विश्वसनीयता के लिए ठोस साक्ष्य प्रस्तुत करना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने कहा कि भाजपा का स्पष्ट मत है कि प्रत्येक पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची में होना चाहिए और अपात्र, मृत अथवा दोहरे पंजीकरण जैसी त्रुटियों को निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अंतर्गत सुधारा जाना चाहिए।

मतदाता सूची का पुनरीक्षण पारदर्शी, निष्पक्ष और जवाबदेह तरीके से होना चाहिए। जमवाल ने कहा कि कांग्रेस को एसआईआर के संबंध में उठाई गई अपनी आपत्तियों का तथ्यात्मक आधार जनता के सामने रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए चुनावी प्रक्रियाओं पर विश्वास, संस्थागत जवाबदेही और प्रत्येक पात्र मतदाता के अधिकारों की सुरक्षा आवश्यक है। राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है कि वे जनता को सही जानकारी दें और चुनावी सुधारों पर सार्थक संवाद को प्राथमिकता दें।

 
Exit mobile version