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लाहौल स्पीति में पहली बार हो रही ब्लूबेरी की खेती, बढ़ेगा बागवानों का मुनाफा

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लाहौल: हिमाचल प्रदेश में इन दिनों बागवान नई किस्म के फलों को लगा रहे है। ऐसे में लाहौल स्पीति के ठंडे इलाकों में भी नई किस्मों के फल बागवानों की आर्थिकी बढ़ाने में अब फायदेमंद रहेंगे। लाहौल स्पीति के खंगसर पंचायत के शुगू गांव के रहने वाले बागवान ने अब लाहौल में ब्लूबेरी की खेती शुरू की है। उन्होंने बताया कि लाहौल घाटी में ब्लूबेरी फल का स्कोप बेहतर है। ऐसे में बीते साल उन्होंने पहले 4-5 प्लांट्स लगाकर यहां ब्लूबेरी का ट्रायल किया। अपने बगीचे में इस नए किस्म के फल को लगाने पर उन्होंने पाया कि लाहौल स्पीति के ठंडे तापमान में कैसे यह पौधा कामयाब हो सकता है।

ऐसे में अब उन्होंने 500 पौधों का एक बगीचा तैयार किया है। उन्होंने बताया कि कुल्लू से उन्होंने ब्लूबेरी के पौधे लिए थे। ऐसे में लाहौल स्पीति के तापमान में इन्हें पहले उन्होंने जमीन पर उगाया, लेकिन ब्लूबेरी के पौधे के लिए इसकी मिट्टी का PH कम रखना होता है। ऐसे में अब ग्रो बैग ने यह पौधे अच्छी तरह से फल फूल रहे है।

प्रताप ने बताया कि वह पहले अपने खेतों में एग्जॉटिक वेजिटेबल, लिली के फूलों और सेब को लगा रहे थे। ऐसे में बाजार में ब्लूबेरी के बेहतर दाम को देखते हुए उन्हें ब्लूबेरी की खेती करने का ख्याल आया। कई देशों में ठंडे इलाकों ने ब्लूबेरी की फसल लग रही है। पेरू, यूक्रेन जैसी कई जगहों में भी ब्लूबेरी की फसल लग रही है। ऐसे में लाहौल स्पीति में भी अब आने वाले समय में बागवानों के लिए यह अच्छा विकल्प बन सकती है। इन दिनों बाजारों में ब्लूबेरी का दाम 1500 से 2000 रुपये किलो तक मिल रहा है। इससे बागवान की आय भी बढ़ेगी।

उन्होंने बताया कि पिछले साल बागवानी विभाग के द्वारा उनके ब्लूबेरी का ट्रायल देखा गया। जिसके बाद फ्रंट लाइन डिमॉन्स्ट्रेशन फार्म में उन्हें चुना गया है, जिसके बाद 500 प्लांट के इस प्रोजेक्ट के लिए उन्हें विभाग के द्वारा पॉलीहाउस बनाने के लिए 75% की सब्सिडी दी गई है। इस 12.5 लाख के प्रोजेक्ट के लिए उन्हें 9.375 लाख की सब्सिडी मिलने से उनकी मदद हुई है। ऐसे में अब आगामी समय में लाहौल घाटी में ब्लूबेरी की खेती से बागवानों को फायदा मिलेगा।

📍 Location: Lahual (Lahual)

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