हमीरपुर : राज्यसभा सांसद डॉ. सिकंदर कुमार द्वारा हिमाचल प्रदेश में मृदा अपरदन, नदी तटीय क्षेत्रों की सुरक्षा, पेयजल योजनाओं के पुनर्निर्माण तथा जल गुणवत्ता निगरानी से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए जाने पर केंद्र सरकार ने सदन में विस्तृत जानकारी दी।
जल शक्ति मंत्रालय में राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी ने बताया कि बाढ़ प्रबंधन, अपरदन-रोधी कार्यों तथा पेयजल योजनाओं का निर्माण और क्रियान्वयन संबंधित राज्य सरकारें अपनी प्राथमिकताओं के अनुसार करती हैं, जबकि केंद्र सरकार तकनीकी मार्गदर्शन और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराकर राज्यों के प्रयासों को गति देती है।
डॉ. सिकंदर कुमार ने पूछा था कि क्या केंद्र सरकार ने हिमाचल प्रदेश में ब्यास, रावी और सतलुज नदी घाटियों के संरचनात्मक तटीकरण (चैनलाइजेशन) के लिए कोई विशेष वित्तीय पैकेज स्वीकृत किया है।
साथ ही उन्होंने पिछले दो वर्षों में बादल फटने और मानसूनी बाढ़ से क्षतिग्रस्त पेयजल योजनाओं के पुनर्निर्माण एवं रेट्रोफिटिंग के लिए दी गई सहायता तथा ग्रामीण जल नेटवर्क में भारी धातुओं और जैविक प्रदूषण की जांच के लिए स्रोत स्तर पर स्वचालित इंटरनेट ऑफ थिंग्स आधारित जल गुणवत्ता निगरानी प्रणाली लागू करने संबंधी जानकारी भी मांगी।
राज्य मंत्री ने उत्तर में बताया कि केंद्र सरकार बाढ़ प्रबंधन एवं सीमावर्ती क्षेत्र कार्यक्रम के तहत नदी प्रबंधन, बाढ़ नियंत्रण, अपरदन-रोधी तथा जल निकासी विकास जैसे कार्यों में राज्यों की सहायता कर रही है। इस योजना के अंतर्गत हिमाचल प्रदेश सरकार को अब तक 875.27 करोड़ रुपए की केंद्रीय सहायता जारी की जा चुकी है।

