हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में बादल फटने और लगातार हो रही भारी बारिश के कारण ब्यास नदी का जलप्रवाह काफी बढ़ गया है। गढ़सा घाटी में बादल फटने के बाद नदी उफान पर है। एहतियात के तौर पर पंडोह डैम से करीब 28 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है।
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बढ़ते जलस्तर को देखते हुए जिला प्रशासन ने निचले क्षेत्रों के लिए अलर्ट जारी किया है। भारी मात्रा में सिल्ट आने के कारण बग्गी सुरंग को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है, जिससे डैहर पावर हाउस में बिजली उत्पादन भी फिलहाल ठप हो गया है।
विद्युत एवं यांत्रिक मंडल, पंडोह (बीबीएमबी) के अधिशाषी अभियंता चंद्रमोहन ने बताया कि पंडोह डैम के सभी पांचों गेट खुले हुए हैं। डैम की झील का जलस्तर लगभग 2916 फीट दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा कि डैम के पीछे से ब्यास नदी में जितना पानी आ रहा है, लगभग उतना ही नियंत्रित तरीके से आगे छोड़ा जा रहा है, ताकि जलस्तर सुरक्षित सीमा में बना रहे। विभाग पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है और आवश्यकता के अनुसार कदम उठाए जा रहे हैं।
अधिकारियों के अनुसार, बग्गी सुरंग में अत्यधिक सिल्ट जमा होने के कारण उसे बंद करना पड़ा है। सिल्ट का स्तर कम होने के बाद स्थिति की समीक्षा कर सुरंग को दोबारा चालू किया जाएगा, जिसके बाद डैहर पावर हाउस में बिजली उत्पादन भी सामान्य हो सकेगा।
बीबीएमबी और जिला प्रशासन की अपील
बीबीएमबी और जिला प्रशासन ने लोगों से ब्यास नदी, नालों और अन्य जलधाराओं के किनारे जाने से बचने की अपील की है। प्रशासन ने कहा है कि नदी का जलस्तर अचानक बढ़ सकता है, इसलिए किसी भी तरह की लापरवाही न बरतें। पंडोह से मंडी तक स्थापित अर्ली वार्निंग सिस्टम और बीबीएमबी का प्रचार वाहन लगातार लोगों को सतर्क कर रहा है। किसी भी आपात स्थिति में प्रशासन और पुलिस के निर्देशों का पालन करें तथा अफवाहों पर ध्यान न दें।
नदी किनारे फोटोग्राफी से बचें
प्रशासन ने पर्यटकों और स्थानीय लोगों से नदी किनारे फोटो या वीडियो बनाने के लिए न जाने की अपील की है। साथ ही बच्चों को भी नदी, नालों और जलधाराओं के पास न जाने दें, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।
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