शिमला। लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे करुणामूलक आश्रित अपनी समस्याएं लेकर धर्मशाला पहुंचे और उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री व एचआरटीसी उपाध्यक्ष अजय वर्मा से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने विधानसभा चुनावों के दौरान कांग्रेस नेताओं द्वारा किए गए वादों को याद दिलाते हुए सरकार से जल्द मांगें पूरी करने की गुहार लगाई। इस मौके पर करुणामूलक संघ के सचिव विशाल सिंह सहित बड़ी संख्या में करुणामूलक आश्रित मौजूद रहे।
करुणामूलक आश्रितों ने कहा कि उनकी प्रमुख मांगों में करुणामूलक नीति के तहत प्रदेश सरकार द्वारा निर्धारित 3 लाख रुपये की वार्षिक आय सीमा को समाप्त करना और सभी पात्र आश्रितों को वन टाइम सेटलमेंट के तहत सरकारी नौकरी प्रदान करना शामिल है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में अभी भी करीब 1650 ऐसे करुणामूलक परिवार हैं, जिनकी वार्षिक आय 3 लाख रुपये से अधिक है और वे नौकरी से वंचित हैं। आश्रितों का कहना है कि केवल आय सीमा के आधार पर इन परिवारों को नौकरी से वंचित रखना उनके साथ अन्याय है।
आश्रितों ने कहा कि चाहे किसी परिवार की वार्षिक आय 3 लाख रुपये हो या इससे अधिक, सभी ने सरकारी सेवा के दौरान अपने माता या पिता को खोया है। ऐसे में प्रदेश सरकार को आय के आधार पर भेदभाव करने के बजाय सभी करुणामूलक परिवारों को समान दृष्टि से देखते हुए वन टाइम सेटलमेंट के तहत जल्द नौकरी प्रदान करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि लंबे समय से नौकरी की आस लगाए करुणामूलक आश्रित दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं। विधानसभा चुनावों के दौरान कांग्रेस नेताओं ने विभिन्न जनमंचों से यह आश्वासन दिया था कि सत्ता में आने के बाद सरकारी सेवा के दौरान मृत कर्मचारियों के आश्रितों को बिना किसी शर्त के नौकरी प्रदान की जाएगी।
इस दौरान उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने करुणामूलक परिवारों को आश्वासन दिया कि सरकार ने इन परिवारों के साथ जो भी वादे किए हैं, उन्हें जल्द पूरा करने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि आगामी कैबिनेट बैठक में करुणामूलक आश्रितों की इस मांग को चर्चा के लिए रखा जाएगा।
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