
धर्मशाला: भारतीय जनता पार्टी के मुख्य प्रवक्ता एवं सुन्दरनगर के विधायक राकेश जम्वाल ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पिता के प्रति कथित रूप से की गई अपमानजनक टिप्पणी की कड़े शब्दों में निंदा की है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक विरोध लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन किसी के दिवंगत पिता और परिवार को निशाना बनाना भारतीय संस्कृति, सामाजिक मर्यादाओं और लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध है।
राकेश जम्वाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपना जीवन राष्ट्रसेवा और देश के विकास के लिए समर्पित किया है। उनके परिवार के प्रति अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करना कांग्रेस की संकीर्ण राजनीतिक सोच और बढ़ती हताशा को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि राजनीति में विचारों और नीतियों का विरोध होना चाहिए, न कि व्यक्तिगत अपमान और परिवार पर अनर्गल टिप्पणियां।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व को अपनी राजनीतिक जिम्मेदारी समझते हुए सार्वजनिक जीवन में शालीनता और मर्यादा बनाए रखनी चाहिए। लोकतंत्र में असहमति का अधिकार सभी को है, लेकिन यह अधिकार किसी को भी अपमानजनक भाषा के प्रयोग की छूट नहीं देता। उन्होंने मल्लिकार्जुन खरगे से मांग की कि वे अपनी कथित टिप्पणी पर स्थिति स्पष्ट करें और यदि टिप्पणी अपमानजनक थी, तो देश की जनता से सार्वजनिक रूप से माफी मांगें।
भाजपा विधायक ने कहा कि कांग्रेस अपनी राजनीतिक चुनौतियों और असफलताओं पर आत्ममंथन करने के बजाय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाना बनाने में लगी हुई है। जनता सब देख रही है और वह विकास, सुशासन तथा राष्ट्रहित की राजनीति और व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप के बीच अंतर भली-भांति समझती है।
राकेश जम्वाल ने कहा कि भारत का लोकतंत्र संविधान, लोकतांत्रिक संस्थाओं और जनता के विश्वास पर आधारित है। राजनीतिक मतभेदों को संवैधानिक एवं लोकतांत्रिक तरीके से व्यक्त करना ही स्वस्थ लोकतंत्र की पहचान है। देश की शांति, सामाजिक सद्भाव और लोकतांत्रिक परंपराओं को कमजोर करने वाली किसी भी बयानबाजी से सभी राजनीतिक दलों को बचना चाहिए।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत विकास, आत्मनिर्भरता और वैश्विक प्रतिष्ठा के नए आयाम स्थापित कर रहा है। कांग्रेस की ओर से की जाने वाली व्यक्तिगत टिप्पणियों और अपमानजनक बयानबाजी से भाजपा कार्यकर्ताओं का राष्ट्रसेवा का संकल्प कमजोर नहीं होगा। सार्वजनिक जीवन में भाषा की मर्यादा बनाए रखना प्रत्येक राजनीतिक दल के नेतृत्व की जिम्मेदारी है। कांग्रेस को व्यक्तिगत टिप्पणियों की राजनीति छोड़कर जनहित के मुद्दों पर सकारात्मक चर्चा करनी चाहिए। देश की जनता राजनीति में शालीनता, जवाबदेही और विकास चाहती है, न कि अपमानजनक बयानबाजी।
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