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कुल्लू दशहरा में आकर्षण का केंद्र बने चीड़ की पत्तियों से बने कप-प्लेट, बिच्छू बूटी का पास्ता भी लोगों को आया पसंद

Cups and plates made from pine leaves became the centre of attraction at Kullu Dussehra

हिमाचल डेस्क: जिला कुल्लू के मुख्यालय ढालपुर में अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव को लेकर विभिन्न उत्पादों को लेकर स्टॉल सजे हुए हैं। ऐसे में यहां पर चीड़ की पत्तियों से बनाए गए कप, प्लेट भी लोगों का आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं, इसके अलावा स्टॉल में जंगलों में उगने वाले बिच्छू बूटी का पास्ता और कुकीज़ भी लोग पसंद कर रहे हैं। कांगड़ा जिला के धर्मशाला में हिमालय पाइन कंपनी के द्वारा यह उत्पाद तैयार किए गए हैं और दशहरा उत्सव में लोग इनकी जानकारी भी हासिल कर रहे हैं।

हिमाचल प्रदेश में चीड़ की पत्तियों से जहां कई सहायता समूह या कई तरह के उत्पाद बना रहे हैं। तो वही हिमालय पाइन कंपनी के द्वारा पहली बार इसके कप, प्लेट, कटोरी सहित अन्य उत्पाद तैयार किए गए हैं। जो पूरी तरह से इको फ्रेंडली है और इससे किसी भी तरह का नुकसान भी नहीं होता है। हिमालय पाइन कंपनी के द्वारा यहां पर यह उत्पाद लोगों को बेचे भी जा रहे हैं और किस तरह से इसे तैयार किया जाता है इसकी भी जानकारी दी जा रही है।



हिमालय पाइन कंपनी दो युवाओं अभिनव तलवार और भूमि तलवार के द्वारा स्टार्ट किया गया अपना एक नया स्टार्टअप है। जिसमें स्थानीय महिला मंडलों से पहले जंगलों में गिरी हुई चीड़ की पत्तियां खरीदी जाती है। उसके बाद उन पत्तियों को मसला जाता है। इस कप को बनाने के लिए मशीन की सहायता से चीड़ की पत्तियों का आकार दिया जाता है और उसमें चीड़ के पेड़ से निकलने वाले गोंद सेल्यूलोज के साथ-साथ दो प्रतिशत लाइमस्टोन भी मिलाया जाता है। ताकि कप पूरी तरह से कठोर हो सके। हिमालय पाइन के द्वारा यह कदम इसलिए उठाया गया कि हर साल गर्मियों में चीड़ की पत्तियों के चलते जंगलों में पूरी तरह से आग फैल जाती है और पेड़ पौधों के अलावा जंगलों में रहने वाले जानवर भी उस आग की चपेट में आते हैं। ऐसे में कंपनी के द्वारा चीड़ की पत्तियों से यह उत्पाद तैयार किए जाने लगे हैं। जो विभिन्न स्टॉल और ऑनलाइन माध्यम हम से भी लोगों को उपलब्ध करवाए जा रहे हैं।



दशहरा उत्सव में लगाए गए स्लॉट में पहली बार बिच्छू बूटी का पास्ता और कुकीज़ भी रखे गए हैं। इसके अलावा चीड़ के पेड़ से निकलने वाले गोंद सैलूलोज और कोकोनोट शूगर के साथ मिलकर उसकी चॉकलेट तथा टॉफी भी तैयार की गई है। जो पूरी तरह से ऑर्गेनिक है। इन युवाओं का प्रयास है कि लोग जंक फूड की बजाय प्राकृतिक फूड को रोजाना अपने जीवन में ले। ताकि उन्हें प्राकृतिक चीजों से सभी विटामिन और मिनरल मिल सके। बिच्छू बूटी से तैयार पास्ता में मैदा की बजाय सूजी का प्रयोग किया गया और कुकीज में भी बिच्छू बूटी तथा सूजी ही प्रयोग में लाई गई है। ताकि लोग जंक फूड से दूर रह सके। गौर रहे कि बिच्छू बूटी पहाड़ी इलाकों में पाई जाती है और ग्रामीण क्षेत्रों में इसका साग बनाकर खाया जाता है। बिच्छू बूटी में कई औषधीय गुण पाए जाते हैं जो मानव शरीर के लिए काफी फायदेमंद होते हैं।



ढालपुर में स्टॉल में मौजूद युवा अभय भारद्वाज ने बताया कि हिमाचल के जंगलों में चीड़ की पत्तियों से हर साल भयंकर आग लगती है। ऐसे में इस समस्या से बचने के लिए चीड़ की पत्तियों से कप प्लेट और कटोरी तैयार की जा रही है। जो पूरी तरह से बायोडिग्रेडेबल है। 4 साल तक इसका उपयोग किया जा सकता है और इसमें प्रयोग होने वाले कलर भी प्राकृतिक तौर पर उगने वाले फूलों से लिए गए हैं। इसके अलावा बिच्छू बूटी के गुण भी लोगों को मिल सके। उसके लिए भी पास्ता और कुकीज़ तैयार किए गए हैं। दशहरा उत्सव में यह स्टॉल लगाया गया है। इसके अलावा भी अन्य जगहों पर स्टाल लगाकर लोगों को इसके बारे में जागरूक किया जा रहा है। 



स्टॉल पर मौजूद युवा अंकुश का कहना है कि जो भी लोग स्टॉल पर आ रहे हैं वह यही बात पूछ रहे हैं कि आखिर यह कप चीड़ की पत्तियों से कैसे तैयार हुआ है। उसके बारे में सभी लोगों को जानकारी दी जा रही है। ताकि लोग इन कप का प्रयोग अपने रोजमर्रा के जीवन में कर सके। स्टॉल में प्राकृतिक चीजों से कई अन्य उत्पाद भी तैयार किए गए हैं जो पूरी तरह से रसायन मुक्त है। हमारा प्रयास यही है कि लोग रोजमर्रा के जीवन में इनका प्रयोग करें। ताकि वह पूरी तरह से स्वस्थ जीवन जी सके।

📍 Location: Kullu (Kullu)

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