जवाली : अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त पौंग झील एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार वजह पर्यटन या सौंदर्य नहीं, बल्कि प्रवासी परिंदों की रहस्यमयी और डरावनी मौतें हैं। झील किनारे वन्य प्राणी विभाग की भूमि पर जगह-जगह विदेशी परिंदों के मृत मिलने से पूरे क्षेत्र में दहशत फैल गई है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या पौंग झील बर्ड फ्लू की चपेट में है या फिर यह मानव लालच और विभागीय लापरवाही का घातक खेल है। स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों का आरोप है कि वन्य प्राणी विभाग की जमीन पर खुलेआम अवैध खेती की जा रही है। फसलों में इस्तेमाल हो रही जहरीली दवाइयां प्रवासी परिंदों के लिए मौत का कारण बन रही हैं, वहीं कई जगह जंदरियों (फंदों) से शिकार किए जाने की भी आशंका जताई जा रही है।
गौरतलब है कि दो-तीन वर्ष पूर्व भी पौंग झील में बर्ड फ्लू फैलने से बड़ी संख्या में परिंदों की मौत हुई थी। उस समय मृत परिंदों को दफन कर मामला शांत कर दिया गया,लेकिन आज हालात और भी भयावह नजर आ रहे हैं। पर्यावरण प्रेमियों ने सनसनीखेज खुलासा करते हुए बताया कि हाल ही में झील किनारे विस्फोटक सामग्री से गायों के जबड़े उड़ने की घटनाएं सामने आई हैं। इससे आशंका जताई जा रही है कि इसी तरह की खतरनाक सामग्री का इस्तेमाल प्रवासी परिंदों के शिकार में भी किया जा सकता है। पहले भी झील किनारे परिंदों के पंखों के ढेर मिल चुके हैं, लेकिन तब विभाग ने सारा दोष सियारों पर डालकर पल्ला झाड़ लिया।
पर्यावरण प्रेमियों का दावा है कि इस समय झील में करीब 60 हजार प्रवासी परिंदे मौजूद हैं, लेकिन उनकी सुरक्षा को लेकर वन्य प्राणी विभाग पूरी तरह उदासीन बना हुआ है। आरोप यह भी है कि अवैध खेती अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से फल-फूल रही है। हाईकोर्ट का ऐतिहासिक हस्तक्षेप मामले की गंभीरता को देखते हुए माननीय उच्च न्यायालय ने सख्त रुख अपनाया है। न्यायालय ने आदेश जारी किए हैं कि जलाशय क्षेत्र में कोई भी हल नहीं जोतेगा, जो फसल बोई गई है उसे तुरंत हटाया जाएगा, फसल सुरक्षा के लिए लगाई गई बाड़ को भी हटाया जाएगा, और पूरे क्षेत्र की ड्रोन के माध्यम से निगरानी की जाएगी।
यह ऐतिहासिक फैसला पर्यावरण प्रेमी मिल्खी राम की शिकायत पर आया है। इस निर्णय के बाद पर्यावरण प्रेमियों ने अपने सहयोगियों के साथ मिनी सचिवालय के मैदान में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर माननीय उच्च न्यायालय का आभार जताया और इसे पौंग झील व प्रवासी परिंदों के संरक्षण की दिशा में मील का पत्थर बताया। अब सबसे बड़ा सवाल यही है क्या पौंग झील के परिंदों को इंसाफ मिलेगा, या फिर मौत का यह सिलसिला यूँ ही चलता रहेगा? पूरा प्रदेश इस जवाब का इंतजार कर रहा।
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