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किन्नौर कैलाश यात्रा पर प्रतिबंध लागू कराने की मांग, हजारों लोग सड़कों पर उतरे

रिकांगपिओ: किन्नौर कैलाश यात्रा पर प्रशासन की ओर से लगाए गए प्रतिबंध को सख्ती से लागू कराने की मांग को लेकर सोमवार को किन्नौर के रिकांगपिओ में टुकपा खूंद से जुड़े हजारों लोग सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों ने जिला प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए उपायुक्त डॉ. अमित कुमार शर्मा को ज्ञापन सौंपा और प्रतिबंध के बावजूद जारी यात्रा को तत्काल रोकने की मांग की। उपायुक्त ने प्रतिनिधिमंडल को नियमानुसार कार्रवाई का आश्वासन दिया।

टुकपा खूंद के मेबर गांव से जुड़े देव समाज के प्रतिनिधि परमेश्वर नेगी ने कहा कि प्रशासन की रोक के बावजूद किन्नौर कैलाश यात्रा कथित रूप से गुपचुप तरीके से करवाई जा रही है, जिससे धार्मिक परंपराओं और पर्यावरण दोनों को नुकसान पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि किन्नौर कैलाश केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि किन्नौर, शिमला और उत्तराखंड के देवी-देवताओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। उन्होंने आरोप लगाया कि बड़ी संख्या में श्रद्धालु पर्वत पर फैली दुर्लभ वनस्पतियों, ब्रह्मकमल और औषधीय पौधों को नुकसान पहुंचा रहे हैं, जिससे संवेदनशील हिमालयी पारिस्थितिकी प्रभावित हो रही है।

साथ ही, स्थानीय मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव के शीतकालीन निवास माने जाने वाले पवित्र शिवलिंग तक जूतों सहित पहुंचने की घटनाएं धार्मिक भावनाओं को आहत कर रही हैं। परमेश्वर नेगी ने कहा कि इस संबंध में जिला प्रशासन को पहले भी कई बार ज्ञापन दिए जा चुके हैं, लेकिन अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। उनका कहना था कि किन्नौर और शिमला के कई देवी-देवताओं की ओर से भी यात्रा रोकने के आदेश दिए गए हैं, फिर भी यात्रा जारी है और इसमें कुछ स्थानीय लोगों की भी भूमिका बताई जा रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने जल्द प्रतिबंध को प्रभावी ढंग से लागू नहीं किया तो पूरे किन्नौर का देव समाज व्यापक आंदोलन छेड़ेगा, जिसकी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।

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