
शिमला : किन्नौर के रक्छम-छितकुल वन्यजीव अभयारण्य से वन्यजीव प्रेमियों और पक्षी विशेषज्ञों के लिए बड़ी खुशखबरी आई है। यहां पहली बार यूरोप से आने वाले प्रवासी जलपक्षी कॉमन ग्रीनशैंक की मौजूदगी दर्ज की गई है। इस पक्षी की तस्वीरें वन विभाग की टीम ने नियमित निगरानी के दौरान कैमरे में कैद की हैं। इसके साथ ही यह किन्नौर जिले का इस प्रजाति का पहला आधिकारिक रिकॉर्ड बन गया है। इस महत्वपूर्ण उपलब्धि को ब्लॉक फॉरेस्ट ऑफिसर संतोष कुमार ठाकुर के नेतृत्व में कार्य कर रही रक्छम टीम ने हासिल किया।
उनके साथ गोपाल नेगी और अल्पना नेगी भी मौजूद थे, जिन्होंने पक्षी की पहचान और दस्तावेजीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार कॉमन ग्रीनशैंक एक प्रवासी जलपक्षी है, जो हर वर्ष उत्तरी यूरोप और एशिया के ठंडे क्षेत्रों से हजारों किलोमीटर की लंबी उड़ान भरकर भारतीय उपमहाद्वीप पहुंचता है। यह पक्षी नदियों के किनारों, आर्द्रभूमियों (वेटलैंड) और उथले जलाशयों में रहना पसंद करता है। किन्नौर में इसका मिलना इस बात का संकेत है कि रक्छम-छितकुल क्षेत्र प्रवासी पक्षियों के लिए सुरक्षित और अनुकूल पड़ाव बनता जा रहा है।
वन्यप्राणी विशेषज्ञ हिमांशु चौधरी ने बताया कि इससे पहले कॉमन ग्रीनशैंक का रिकॉर्ड स्पीति क्षेत्र और वर्ष 2024 में रंगरिक से मिला था, लेकिन किन्नौर जिले में पहली बार इसकी मौजूदगी प्रमाणित हुई है। इससे जिले की पक्षी सूची में एक नई प्रजाति जुड़ गई है और हिमालयी क्षेत्रों में पक्षियों के प्रवास को समझने में वैज्ञानिकों को नई जानकारी मिलेगी। हिमाचल प्रदेश की ई-बर्ड समन्वयक डॉ. माल्याश्री भट्टाचार्य ने भी पुष्टि की है कि ई-बर्ड प्लेटफॉर्म पर किन्नौर जिले से कॉमन ग्रीनशैंक का यह पहला रिकॉर्ड दर्ज हुआ है।
उन्होंने इसे नागरिक विज्ञान और पक्षी अनुसंधान की दृष्टि से महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। यह खोज साबित करती है कि किन्नौर उच्च हिमालय में प्रवासी पक्षियों का एक महत्वपूर्ण माइग्रेशन कॉरिडोर बन चुका है। वन विभाग का कहना है कि प्रवासी पक्षियों का हर नया रिकॉर्ड उनके उड़ान मार्ग और प्राकृतिक आवास को समझने में बेहद उपयोगी होता है। ऐसे दस्तावेज भविष्य में संरक्षण योजनाओं को मजबूत बनाने के साथ-साथ हिमाचल में पक्षी अनुसंधान को भी नई दिशा देंगे।