शिमला: नगर निगम शिमला की आय का मुख्य साधन सम्पति किराया और प्रॉपर्टी टैक्स हैं। लेकिन एमसी को किराया और प्रॉपर्टी टैक्स ना देने वालो डिफालटरों के कारण एमसी को हर साल लाखों का नुकसान होता हैं। बता दें कि निगम ने 1300 से ज्यादा संपत्तियां किराए पर दी हैं, इनमें ज्यादातर दुकानें शामिल हैं। कई दुकानदार समय पर किराया जमा नहीं करवाते। कुछ दुकानदारों ने पिछले दो से पांच साल तक का किराया जमा नहीं करवाया है। इनकी किराया राशि लाखों में पहुंच चुकी है। निगम को किराया राशि से तीन करोड़ रुपए से ज्यादा की आय होनी है। किराया भुगतान न होने से नगर निगम को नुकसान हो रहा है। ऐसे में एमसी अब इन डिफालटर किरायदारों को कसने की तैयारी में है।
नगर निगम ने करीब 300 डिफाल्टरों को नोटिस जारी किए हैं, इसमें से करीब 150 डिफाल्टरों के बिजली पानी कनेक्शन काटने के भी आदेश जारी कर दिए हैं। इनमें से कई डिफाल्टरों को तीन बार से ज्यादा नोटिस भी जारी हो चुके हैं। ऐसे में अब डिफाल्टरों के बिजली और पानी के कनेक्शन काटेगें। इसको लेकर नगर निगम ने सभी डिफाल्टरों की सूची बिजली बोर्ड और शिमला जल प्रबंधन निगम को सौंप दी है और बिजली पानी के कनेक्शन काटने के आदेश जारी किए हैं। साथ ही एक हफ्ते के भीतर इनका कनेक्शन काटने और इसकी रिपोर्ट नगर निगम को भेजने के आदेश जारी हुए हैं। बता दें कि डिफाल्टरों में ज्यादातर दुकानदार शामिल हैं जिन्होंने दो से पांच साल का किराया जमा नहीं करवाया है। इन्हें तीन बार नगर निगम ने किराया जमा करने के लिए नोटिस जारी किए थे, लेकिन इसके बावजूद यह किराया जमा नही करवाया गया और अब एमसी ने कार्यवाही अमल में लाई है।
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