Site icon Dainik Savera Times

भूमिहीन परिवारों को भूमि अधिकार और आवारा कुत्तों से सुरक्षा की मांग

Gadar Front Raises Stray Dog Menace in Shimla : शिमला। गदर फ्रंट हिमाचल प्रदेश ने भूमिहीन SC, ST और अति पिछड़ा वर्ग परिवारों को भूमि व आवासीय अधिकार देने तथा शिमला में आवारा कुत्तों के बढ़ते आतंक से लोगों, खासकर बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग को लेकर राज्यपाल कविंद्र गुप्ता को दो ज्ञापन सौंपे। फ्रंट के संयोजक रवि कुमार दलित के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने दोनों मुद्दों पर कार्रवाई की मांग रखी।

पहले ज्ञापन में हिमाचल प्रदेश में लंबे समय से सरकारी और वन भूमि पर रह रहे अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अति पिछड़ा वर्ग समुदाय भूमिहीन परिवारों को आवासीय अधिकार देने की मांग प्रमुखता से उठाई गई। गदर फ्रंट ने कहा कि वर्षों से जमीन और स्थायी आवास की समस्या से जूझ रहे गरीब परिवारों के मामले को मानवीय और न्यायपूर्ण दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए। विशेष रूप से अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के भूमिहीन परिवारों को भूमि उपलब्ध करवाने की मांग ज्ञापन में रखी गई। फ्रंट ने कहा कि प्रदेश में ऐसे अनेक परिवार हैं, जो पीढ़ियों से एक ही स्थान पर रहते आ रहे हैं, लेकिन उनके पास अपनी जमीन का वैध अधिकार नहीं है।

संगठन ने सरकार से इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए स्पष्ट नीति बनाने और पात्र परिवारों को आवासीय भूमि का अधिकार देने की मांग की। अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अति पिछड़ा वर्ग के अनेकों परिवार कई दशकों से सरकारी भूमि, वन विभाग की भूमि अथवा अन्य सरकारी नियंत्रण वाली भूमि पर छोटी-छोटी झोपड़ियों, कच्चे-पक्के मकानों अथवा आवासीय ढांचों में रहकर अपने परिवारों का पालन-पोषण कर रहे हैं। इन परिवारों का प्रश्न केवल जमीन का प्रश्न नहीं है, बल्कि सम्मान, सुरक्षा, स्थायी आवास और सामाजिक न्याय का प्रश्न है। हिमाचल प्रदेश के राजस्व विभाग द्वारा भूमिहीन परिवारों को भूमि आवंटन से संबंधित मौजूदा नियमों, नौतोड़ व्यवस्था तथा अन्य लागू प्रावधानों की समीक्षा कर अनुसूचित जाति के अत्यंत गरीब और भूमिहीन परिवारों के लिए विशेष प्रावधान तैयार किए जाएं।

हिमाचल में प्रत्येक पात्र परिवार का सर्वेक्षण कर यह रिकॉर्ड तैयार किया जाए कि वह संबंधित स्थान पर कितने वर्षों से रह रहा है, भूमि की वर्तमान स्थिति क्या है तथा परिवार के पास अन्य कोई आवासीय भूमि है अथवा नहीं। विशेष रूप से शिमला नगर निगम क्षेत्र में लंबे समय से रह रहे भूमिहीन अनुसूचित जाति परिवारों का विशेष सर्वेक्षण कराया जाए तथा पात्र परिवारों के मामलों का समयबद्ध निपटारा किया जाए। केंद्र सरकार के Forest Rights Act, 2006 (वन अधिकार अधिनियम) के अंतर्गत आने वाले पात्र वनवासी परिवारों के मामलों में कानून के अनुसार उनके दावों की पहचान और निस्तारण की प्रक्रिया को प्रभावी बनाया जाए। साथ ही, अनुसूचित जाति के उन परिवारों के लिए जिन पर FRA सीधे लागू नहीं होता, राज्य सरकार अपनी संवैधानिक शक्तियों और उपलब्ध राजस्व कानूनों के अंतर्गत अलग से विशेष व्यवस्था बनाए। दूसरे ज्ञापन में शिमला में आवारा कुत्तों की समस्या और हाल में बच्ची पर हुए हमले का मुद्दा उठाया गया।

गदर फ्रंट ने राज्यपाल को बताया कि शहर में आवारा कुत्तों के झुंड लोगों के लिए लगातार चिंता का कारण बने हुए हैं। बच्चों, बुजुर्गों और पैदल चलने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर ठोस कदम उठाने की जरूरत है। इससे पहले फ्रंट ने इस मामले को नगर निगम के समक्ष भी उठाया था और वार्डवार सर्वे तथा संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष व्यवस्था की मांग की थी। रवि कुमार दलित ने कहा कि यह केवल किसी एक परिवार या एक घटना का मामला नहीं है, बल्कि नागरिकों की सुरक्षा और अधिकारों से जुड़ा सवाल है। उन्होंने कहा कि शिमला के लोगों को आवारा कुत्तों के आतंक से सुरक्षित वातावरण मिलना जरूरी है।

Exit mobile version