Last Updated: October 10, 2026

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गग्गल एयरपोर्ट विस्तार ; 400 परिवारों को इसी महीने मिलेगा पुनर्वास एवं पुनर्व्यवस्थापन

April 9, 2026

गग्गल एयरपोर्ट विस्तार ; 400 परिवारों को इसी महीने मिलेगा पुनर्वास एवं पुनर्व्यवस्थापन

धर्मशाला : हिमाचल प्रदेश के जिला कांगड़ा में स्थित गग्गल हवाई अड्डा के प्रस्तावित विस्तारीकरण को लेकर अब प्रक्रिया तेज हो गई है। भूमि अधिग्रहण का कार्य पूरा होने के बाद प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन ने विस्थापित परिवारों के पुनर्वास एवं पुनर्व्यवस्थापन (आरएंडआर) की योजना को लागू करने की दिशा में तेजी दिखाई है। प्रशासन के अनुसार, इस योजना का पहला चरण इसी महीने शुरू किया जाएगा, जिससे प्रभावित परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है।

जानकारी के मुताबिक, एयरपोर्ट विस्तार की जद में शाहपुर और कांगड़ा के 14 रेवेन्यू विलेज आ रहे हैं। जानकारी के अनुसार इनमें रछियालु गांव के प्रभावितों को सबसे पहले यानी इसी महीने आरएंडआर दे दिया जाएगा जहां के लगभग 400 परिवार सीधे तौर पर प्रभावित हो रहे हैं। इन परिवारों को पहले चरण में आर एंड आर योजना के तहत कवर किया जाएगा। गौरतलब है कि गग्गल एयरपोर्ट विस्तार परियोजना हिमाचल प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण अवसंरचनात्मक पहल मानी जा रही है।

इस परियोजना के तहत करीब 150 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया गया है। वर्तमान में एयरपोर्ट का रनवे 1376 मीटर लंबा है, जिसे बढ़ाकर 3010 मीटर करने की योजना है। रनवे के विस्तार के बाद यहां बड़े और आधुनिक विमानों की लैंडिंग संभव हो सकेगी, जिससे न केवल कांगड़ा बल्कि पूरे हिमाचल प्रदेश की हवाई कनेक्टिविटी में बड़ा सुधार होगा। यह है आरएंंडआर प्लान : आरएंंडआर योजना के तहत प्रत्येक विस्थापित परिवार को आवास के लिए 153.6 वर्ग मीटर (लगभग 8 मरला) भूमि प्रदान की जाएगी।

इसके अतिरिक्त, घर बनाने के लिए 3 लाख रुपये की आर्थिक सहायता भी दी जाएगी। योजना की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह भी है कि प्रभावित परिवारों को विकल्प दिया गया है। यदि कोई परिवार पुनर्वास पैकेज के अंतर्गत मिलने वाली भूमि और अन्य लाभ नहीं लेना चाहता, तो वह इसके बदले 37 लाख रुपये की एकमुश्त राशि प्राप्त कर सकता है। इसके अलावा, प्रशासन ने यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया है कि पुनर्वास प्रक्रिया पारदर्शी और परिवारों के हित में हो।

इसी के तहत आवंटित भूमि या मकान की रजिस्ट्री पति और पत्नी के संयुक्त नाम पर की जाएगी, ताकि परिवार की सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। साथ ही, स्टांप शुल्क और अन्य पंजीकरण से संबंधित खर्च भी परियोजना प्राधिकरण द्वारा वहन किया जाएगा, जिससे प्रभावित परिवारों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ न पड़े।

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