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रेड अलर्ट के बीच कहर बनकर बरसा मानसून ; कांगड़ा में बादल फटा, 6 घर बहे

शिमला : हिमाचल प्रदेश में मानसून एक बार फिर कहर बनकर बरसा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के रेड अलर्ट के बीच मंगलवार को कांगड़ा, चंबा और लाहौल-स्पीति समेत कई जिलों में भारी बारिश से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ। कांगड़ा के शाहपुर उपमंडल की बोह घाटी में बादल फटने से छह मकान तेज बहाव में बह गए, जबकि चंबा में भारी भूस्खलन से लाहडू-नूरपुर मुख्य सड़क पूरी तरह अवरुद्ध हो गई। उधर, लाहौल-स्पीति में उफनाते नाले के बीच व्यापारी ने पुलिया के सहारे मटर की पूरी खेप सुरक्षित निकालकर समय पर मंडी भेज दी। सबसे अधिक तबाही कांगड़ा जिले के शाहपुर क्षेत्र की बोह घाटी में देखने को मिली।

बादल फटने के बाद सपेड़ी और गरूं गांव में छह मकान मलबे और तेज बहाव की चपेट में आकर बह गए। गनीमत रही कि समय रहते लोगों के सुरक्षित स्थानों पर पहुंच जाने से कोई जनहानि नहीं हुई। प्रशासन ने तत्काल एसडीआरएफ, राजस्व और स्थानीय प्रशासन की टीमों को राहत एवं बचाव कार्य के लिए मौके पर भेजा। आसपास के लम गांव पर भी खतरा मंडरा रहा है और क्षेत्र में लगातार निगरानी रखी जा रही है। कई संपर्क सड़कें भी क्षतिग्रस्त हो गई हैं।

चंबा जिले में लगातार बारिश के कारण लाहडू-नूरपुर मुख्य सड़क के टिककर गला घार में भारी भूस्खलन हुआ, जिससे मार्ग पूरी तरह बंद हो गया। पहाड़ी से लगातार मलबा और चट्टानें गिरने के कारण यातायात रोक दिया गया है। लोक निर्माण विभाग और प्रशासन की टीमें सड़क बहाल करने में जुटी हैं, लेकिन लगातार बारिश के कारण राहत कार्य प्रभावित हो रहा है। जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति में भी बारिश ने मुश्किलें बढ़ा दी हैं। जाहलमा नाले में अचानक आई बाढ़ से अस्थायी सड़क बह गई। इसके बावजूद एक व्यापारी ने समय पर मटर की फसल मंडी पहुंचाने के लिए मजदूरों की मदद से बीआरओ द्वारा बनाई गई पुलिया के रास्ते पूरी खेप नाले के पार पहुंचाई। इसके बाद दूसरी ओर खड़े वाहन में मटर लोड कर सब्जी मंडियों के लिए रवाना किया गया।

स्थानीय लोगों ने इसे कठिन परिस्थितियों में साहस और सूझ-बूझ का उदाहरण बताया। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने प्रदेश में अगले कई दिनों तक बारिश का दौर जारी रहने की चेतावनी दी है। 22 जुलाई को कांगड़ा और मंडी में भी भारी से बहुत भारी बारिश की आशंका जताई गई है। 23, 26 और 27 जुलाई को भी प्रदेश के अनेक क्षेत्रों में भारी वर्षा की संभावना व्यक्त की गई है। प्रशासन ने लोगों से नदी-नालों के किनारे न जाने, भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में अनावश्यक आवाजाही से बचने और मौसम विभाग की सलाह का पालन करने की अपील की है। राहत एवं बचाव एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है और संवेदनशील इलाकों की लगातार निगरानी की जा रही है।

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