धर्मशाला : कांगड़ा जिले के गग्गल एयरपोर्ट को अंतरराष्ट्रीय स्तर के हवाई अड्डे के रूप में विकसित करने की दिशा में प्रक्रियाएं लगातार आगे बढ़ रही हैं। देश के दूसरे ब्रिज रनवे के रूप में प्रस्तावित इस महत्वाकांक्षी परियोजना में मांझी खड्ड पर बनने वाले रनवे पुल की लंबाई और चौड़ाई लगभग तय हो चुकी है। अब सबसे महत्वपूर्ण तकनीकी पहलू पुल की ऊंचाई को लेकर अंतिम निर्णय होना बाकी है। विशेषज्ञों के अनुसार पुल की ऊंचाई तय होने के बाद एयरपोर्ट विस्तार परियोजना का अगला चरण शुरू हो सकेगा।
परियोजना के तहत मांझी खड्ड पर बनने वाले पुल की लंबाई लगभग 380 मीटर और चौड़ाई करीब 340 मीटर प्रस्तावित है। हालांकि पुल की ऊंचाई तय करने से पहले बरसात के दौरान मांझी खड्ड में होने वाले जल प्रवाह, अधिकतम बाढ़ स्तर, पानी के साथ आने वाले मलबे और बड़े पत्थरों के प्रभाव का विस्तृत अध्ययन किया जा रहा है। इसके साथ ही विमानों के सुरक्षित उड़ान संचालन को भी प्रमुख आधार बनाया गया है, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की तकनीकी या सुरक्षा संबंधी समस्या उत्पन्न न हो।
जानकारों के अनुसार पुल की ऊंचाई का निर्धारण इस परियोजना का सबसे जटिल और महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। यही कारण है कि विभिन्न तकनीकी संस्थानों और विशेषज्ञ एजेंसियों की रिपोर्ट के आधार पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। पुल की ऊंचाई स्वीकृत होते ही निर्माण प्रक्रिया को गति मिलने की उम्मीद है। जिला पर्यटन अधिकारी विनय धीमान ने बताया कि मांझी खड्ड पुल की ऊंचाई को लेकर तकनीकी प्रक्रिया जारी है। सभी आवश्यक पहलुओं का अध्ययन करने के बाद ही इसका अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
प्रभावितों को दिया जा चुका है भू-मुआवजा :
परियोजना से प्रभावित अधिकांश परिवारों को उनकी भूमि का मुआवजा दिया जा चुका है। इसके अलावा पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन (आर एंड आर) नीति के तहत सात राजस्व गांवों के प्रभावित परिवारों को भी निर्धारित मुआवजा राशि प्रदान की जा चुकी है। प्रशासन का कहना है कि प्रभावित परिवारों के हितों की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता है और पुनर्वास प्रक्रिया को नियमानुसार पूरा किया जा रहा है। गग्गल एयरपोर्ट के विस्तार को प्रदेश की सबसे महत्वपूर्ण आधारभूत संरचना परियोजनाओं में शामिल किया जा रहा है। परियोजना पूरी होने के बाद बड़े विमानों का संचालन संभव होगा, जिससे पर्यटन, व्यापार और निवेश को नई गति मिलने की उम्मीद है। विशेष रूप से कांगड़ा, चंबा और हिमाचल के पर्यटन क्षेत्रों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। साथ ही प्रदेश की हवाई संपर्क व्यवस्था भी पहले की तुलना में अधिक मजबूत होगी।

