
शिमला: हिमाचल प्रदेश सरकार भूमि सुधार कानून में बड़े बदलाव की ओर कदम बढ़ाने जा रही है। प्रदेश में उद्योगों और विभिन्न तरह के व्यावसायिक उपक्रमों को जमीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए हिमाचल प्रदेश अभिधृति एवं भूमि सुधार अधिनियम, 1972 की धारा 118 के तहत बनाए गए नियमों को संशोधित करने की तैयारी पूरी कर ली गई है।
सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित संशोधन का मकसद राज्य में निवेश को आसान बनाना और औद्योगिक गतिविधियों को नई गति देना है। वर्तमान नियमों को जमीन आवंटन में आ रही दिक्कतों का मुख्य कारण माना जाता रहा है।
सदन में पेश होगा भूमि सुधार संशोधन विधेयक 2025
मंगलवार को राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी विधानसभा में हिमाचल प्रदेश अभिधृति एवं भूमि सुधार (संशोधन) विधेयक, 2025 पेश करेंगे। यह विधेयक धारा 118 के उन प्रावधानों में बदलाव का मार्ग प्रशस्त करेगा, जिनका असर राज्य में व्यापारिक और उद्यमिक परियोजनाओं की स्थापना पर पड़ता है। विधेयक पर विस्तृत चर्चा आने वाले सत्रों में होने की संभावना है।
दुकान एवं वाणिज्यिक प्रतिष्ठान कानून में भी बदलाव
इसी के साथ उद्योग, श्रम एवं रोजगार मंत्री द्वारा हिमाचल प्रदेश दुकान एवं वाणिज्यिक स्थापना (संशोधन) विधेयक, 2025 भी सदन में रखा जाएगा। यह संशोधन केंद्र सरकार के ताज़ा नियमों के अनुरूप तैयार किया गया है, जिसमें कामकाजी घंटों से जुड़े कई अहम प्रावधान शामिल हैं।
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ओवरटाइम सीमा 115 से बढ़ाकर 144 घंटे प्रस्तावित
नए प्रस्ताव के अनुसार, तीन महीने में कर्मचारियों के लिए अनुमन्य ओवरटाइम सीमा 115 घंटे से बढ़ाकर 144 घंटे की जा सकती है। यह तभी लागू होगा जब कर्मचारी इसकी सहमति दें। बढ़े हुए कार्य घंटों के लिए अलग मानदेय देने का भी प्रावधान शामिल किया जा रहा है। इसके साथ ही ऐसे कई व्यापारिक प्रतिष्ठान, जो अब तक इस नियम के दायरे में नहीं आते थे, उन्हें भी संशोधित कानून में शामिल किया जाएगा।
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