Himachal BJP New State President: शिमला: हिमाचल प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का संगठनात्मक समीकरण जल्द ही बदल सकता है। प्रदेश भाजपा के नए अध्यक्ष की घोषणा एक सप्ताह के भीतर होने की संभावना है। मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल का कार्यकाल पूरा हो चुका है और पार्टी अब नए नेतृत्व के चयन की ओर बढ़ रही है। राष्ट्रीय नेतृत्व ने इस प्रक्रिया को गति दे दी है और कई नामों पर मंथन चल रहा है।
-दिल्ली में बढ़ी हलचल, फैसले की घड़ी करीब
विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक, भाजपा के शीर्ष संगठनात्मक पदाधिकारी इन दिनों दिल्ली में डेरा जमाए हुए हैं और प्रदेश अध्यक्षों की नियुक्तियों पर लगातार बैठकें हो रही हैं। हिमाचल प्रदेश के नए अध्यक्ष को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। पहलगाम की हालिया घटना के बाद स्थगित हुई यह प्रक्रिया अब दोबारा सक्रिय हो गई है और अंतिम निर्णय जल्द लिया जा सकता है।
-इन नामों पर मंथन
नए प्रदेश अध्यक्ष के लिए जिन चेहरों पर चर्चा हो रही है, उनमें सबसे पहला नाम फिर से डॉ. राजीव बिंदल का है। संगठन के अनुभवी नेता बिंदल को दोबारा मौका दिए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा। इसके अलावा कांगड़ा-चंबा लोकसभा सीट से सांसद राजीव भारद्वाज, राज्यसभा सांसद सिकंदर कुमार, बिलासपुर से विधायक त्रिलोक जम्वाल, और सुंदरनगर से विधायक राकेश जम्वाल के नाम भी सामने आए हैं।
-राजनीतिक और सामाजिक समीकरणों का खेल
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति में जातीय संतुलन, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और संगठन में अनुभव जैसे कारकों को गंभीरता से तौला जा रहा है। सिकंदर कुमार, जो हमीरपुर से हैं और आरएसएस से करीबी संबंध रखते हैं, को सत्ताधारी कांग्रेस के मुख्यमंत्री सुक्खू के गृह क्षेत्र में भाजपा की स्थिति मजबूत करने के लिहाज़ से उपयुक्त माना जा रहा है।
वहीं, कांगड़ा क्षेत्र से सांसद राजीव भारद्वाज को पार्टी का एक प्रमुख ब्राह्मण चेहरा माना जाता है। लंबे समय से संगठन में काम कर रहे भारद्वाज को उनके क्षेत्रीय प्रभाव और अनुभव का लाभ मिल सकता है। युवा चेहरों की बात करें तो त्रिलोक जम्वाल और राकेश जम्वाल संगठन को नई ऊर्जा देने वाले संभावित नाम माने जा रहे हैं।
-भाजपा संगठन में नई रणनीति की तैयारी
सूत्रों की मानें तो पार्टी इस बार ऐसा चेहरा आगे लाना चाहती है जो 2027 के विधानसभा चुनाव और संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने की दिशा में निर्णायक भूमिका निभा सके। ऐसे में नया प्रदेश अध्यक्ष सिर्फ एक औपचारिक नियुक्ति नहीं, बल्कि आगामी चुनावों की रणनीति का एक अहम हिस्सा होगा।
भाजपा की ओर से आधिकारिक घोषणा का इंतजार किया जा रहा है, लेकिन संकेत साफ हैं कि हिमाचल में संगठनात्मक नेतृत्व परिवर्तन की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है।

