शिमला: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में शिक्षा विभाग में शास्त्री के 193 पदों को बैचवाइज भरने से जुड़ी याचिकाओं पर महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। विभाग ने अदालत में शपथ-पत्र दाखिल करके सूचित किया कि रिक्तियों को भरने की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू कर दी गई है। इसे देखते हुए न्यायमूर्ति संदीप शर्मा ने विभाग को भर्ती कार्यवाही को प्राथमिकता के साथ समयबद्ध तरीके से पूर्ण करने के निर्देश दिए।
याचिकाकर्ताओं की ओर से यह मांग की गई थी कि वर्ष 2013 से 2015 बैच के अभ्यर्थियों के आधार पर पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू की जाए और उन्हें मेरिट के अनुसार उचित अवसर दिया जाए। इस पर राज्य सरकार ने स्पष्ट किया कि जिन उम्मीदवारों ने बाद में अपनी शैक्षणिक योग्यता में सुधार किया है, उन्हें भी 2016 के ट्रिब्यूनल के आदेश के अनुसार वरीयता दी जा रही है। उस आदेश में कहा गया था कि सुधारित डिग्री के वर्ष के बजाय प्रारंभिक पासिंग वर्ष को ही मान्य माना जाएगा।
अदालत ने विनोद कुमार शर्मा मामले में पारित फैसले को अंतिम मानते हुए माना कि योग्यता सुधारी कर चुके अभ्यर्थियों पर विचार करना नियमों और न्यायिक व्यवस्था के अनुरूप है और इसमें विभाग द्वारा किसी प्रकार की अवैधता नहीं की गई है।
क्रिप्टो धोखाधड़ी केस: आरोपी को नहीं मिली जमानत
इसी बीच, हाईकोर्ट ने लाखों रुपये की कथित क्रिप्टो करेंसी धोखाधड़ी से जुड़े मामले में आरोपी विजय कुमार जुनेजा की जमानत याचिका खारिज कर दी। न्यायमूर्ति सुशील कुकरेजा ने टिप्पणी करते हुए कहा कि आर्थिक अपराधों का प्रभाव व्यापक होता है, जो न केवल पीड़ितों बल्कि देश की वित्तीय व्यवस्था को भी प्रभावित करते हैं। ऐसे मामलों में केवल लंबी जेल अवधि को जमानत का आधार नहीं बनाया जा सकता।
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अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि आर्थिक अपराध समाज में गंभीर जोखिम उत्पन्न करते हैं और इन्हें विशेष गंभीरता के साथ देखा जाना चाहिए। अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि मामले का मुख्य आरोपी सुभाष शर्मा दुबई फरार है, जिससे आशंका बढ़ती है कि जमानत मिलने पर जुनेजा भी न्याय से बचने का प्रयास कर सकता है। सार्वजनिक धन की भारी हानि और भागने की आशंका को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने जमानत याचिका को अस्वीकार कर दिया।

