Last Updated: November 5, 2026

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हिमाचल सरकार ने 85 किलोमीटर फोरलेन भूमिगत राजमार्ग की योजना का प्रस्ताव किया पेश

July 1, 2024

हिमाचल सरकार ने 85 किलोमीटर फोरलेन भूमिगत राजमार्ग की योजना का प्रस्ताव किया पेश

शिमला: हिमाचल में करीब 85 किलोमीटर फोरलेन सड़कें भूमिगत बनाई जाएंगी। इसके लिए एनएचएआई ने केंद्र सरकार और पर्यावरण मंत्रालय से मंजूरी ले ली है। एनएचएआई 68 सुरंगें बनाने जा रहा है और इनमें से 50 फीसदी से ज्यादा की डीपीआर भी तैयार हो चुकी है। एनएचएआई ने अब तक 11 सुरंगों का निर्माण पूरा कर लिया है, जबकि पूरे प्रदेश में 27 पर काम चल रहा है और 30 सुरंगों की डीपीआर तैयार की जा रही है।

एनएचएआई ने पिछले साल आई आपदा के बाद ही ज्यादातर सुरंगों के प्रस्ताव तैयार कर लिए हैं। दरअसल आपदा के दौरान कुल्लू और मंडी में कीरतपुर-मनाली राष्ट्रीय राजमार्ग को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ था। इसके अलावा पठानकोट-मंडी और पिंजौर-नालागढ़ मार्ग भी आपदा से प्रभावित हुए थे। आपदा के बाद एनएचएआई ने आईआईटी और एनएचएआई के सेवानिवृत्त इंजीनियरों से प्रभावित राष्ट्रीय राजमार्ग का निरीक्षण कराया था और उस दौरान सुरंग बनाने के सुझाव सबसे ज्यादा आए थे।

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भी एनएचएआई को इन आपदा प्रभावित क्षेत्रों में सुरंग निर्माण पर विचार करने के निर्देश दिए थे। अब इन सबके जवाब में एनएचएआई ने चारों लेन के अधिकांश हिस्से को सुरंगों से गुजारने की तैयारी कर ली है। इन सुरंगों के बनने से जहां प्रदेश में चारों लेन की कुल दूरी 126 किलोमीटर कम हो जाएगी, वहीं यात्रियों का सफर 13 घंटे कम हो जाएगा। साथ ही बारिश या बर्फबारी से राष्ट्रीय राजमार्ग प्रभावित नहीं होंगे।

हिमाचल प्रदेश में पठानकोट-मंडी, कालका-शिमला, शिमला-मटौर, कीरतपुर-मनाली और पिंजौर-नालागढ़ राष्ट्रीय राजमार्गों का निर्माण किया जा रहा है। इनमें 68 सुरंगें बनाई जा रही हैं। कीरतपुर-मनाली में 41.31 किलोमीटर लंबी 28 सुरंगें प्रस्तावित हैं। इनमें से 13 का निर्माण हो चुका है। कालका-शिमला फोरलेन हाईवे में कैंथलीघाट और परवाणू के बीच एक सुरंग का निर्माण हो चुका है, जबकि कंडाघाट में करीब एक किलोमीटर लंबी सुरंग का निर्माण अभी जारी है।

इस फोरलेन सड़क में कैंथलीघाट से ढली के बीच आधा दर्जन सुरंगों का निर्माण प्रस्तावित है। पठानकोट-मंडी राष्ट्रीय राजमार्ग पर कोटला में डबल लेन सुरंग का निर्माण किया गया है। सुरंगों की कुल लंबाई 85.110 किलोमीटर है। इन सुरंगों के निर्माण से 12.50 घंटे की बचत होगी तथा पूरे राज्य में दूरी 126 किलोमीटर कम हो जाएगी।

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