शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में हिमाचल प्रदेश सरकार ने अनाथ बच्चों के जीवन में उम्मीद की नई किरण जगाई है। सरकार की मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना के तहत प्रदेश के अनाथ बच्चों को न केवल ‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट’ का दर्जा दिया गया है, बल्कि अब उन्हें प्रदेश के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों में दाखिला दिलाकर मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है। जानकारी के अनुसार अब तक सोलन के पाइनग्रोव पब्लिक स्कूल में चार, शिमला के ताराहॉल स्कूल में तीन और दयानंद पब्लिक स्कूल में आठ अनाथ बच्चों को दाखिला मिल चुका है।
इन बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ खेलकूद और अन्य सह पाठ्यक्रम गतिविधियों में भी बराबरी का अवसर दिया जा रहा है, ताकि वे अपने आप को समाज में उपेक्षित न महसूस करें। सरकार का उद्देश्य केवल शिक्षा देना नहीं, बल्कि इन बच्चों को आत्मनिर्भर बनाना भी है। उच्च और रोजगारपरक शिक्षा के लिए इन्हें आर्थिक सहायता भी दी जा रही है। आईटीआई, पॉलिटेक्निक, इंजीनियरिंग, फार्मेसी जैसे तकनीकी संस्थानों में इनके लिए एक-एक सीट आरक्षित की गई है।
इतना ही नहीं, सरकार इन बच्चों के लिए देशभर के ऐतिहासिक स्थलों और महानगरों का भ्रमण भी करवा रही है। इसमें हवाई यात्र, तीन सितारा होटलों में ठहराव और अन्य सभी खर्च राज्य सरकार वहन कर रही है। मुख्यमंत्री सुक्खू के नेतृत्व में हिमाचल प्रदेश देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है जिसने अनाथ बच्चों के कल्याण के लिए विशेष कानून बनाकर उनके स मानजनक जीवन, देखभाल और शिक्षा के अधिकार सुनिश्चित किए हैं। प्रदेश सरकार का यह कदम न केवल समाज के कमजोर वर्ग को मुख्यधारा में लाने की दिशा में एक ठोस प्रयास है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं की भी मिसाल है।

