शिमला। कांगड़ा जिले में छोटे छत्ते वाले भृंग (एथिना टुमिडा मरे) के प्रकोप से प्रभावित मधुमक्खी पालकों को प्रदेश सरकार 30 प्रतिशत राहत राशि प्रदान करेगी। यह निर्णय राजस्व, बागवानी, जनजातीय विकास एवं जनशिकायत निवारण मंत्री जगत सिंह नेगी की अध्यक्षता में हुई बैठक में लिया गया। बैठक में कांगड़ा जिले के प्रभावित क्षेत्रों में मधुमक्खी पालकों को हुए नुकसान की समीक्षा की गई।
बैठक में बताया गया कि कांगड़ा, बंड्डी, नागण, फट और कल्याड़ा क्षेत्रों में बीटल के प्रसार से मधुमक्खी पालन व्यवसाय को काफी नुकसान पहुंचा है। बीटल मधुमक्खी के बॉक्स में अपना लारवा छोड़ता है, जिसके कारण कुछ ही दिनों में शहद और मधुमक्खियों की कॉलोनी को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। इसके चलते कई मधुमक्खी पालकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है।
बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा कि सरकार प्रभावित मधुमक्खी पालकों के नुकसान को देखते हुए उन्हें 30 प्रतिशत राहत राशि उपलब्ध करवाएगी। उन्होंने बागवानी विभाग के अधिकारियों को नुकसान से संबंधित आवश्यक प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के निर्देश दिए।
मंत्री ने अधिकारियों को प्रदेश में उत्पादित शहद के बेहतर विपणन की दिशा में भी कार्य करने को कहा। उन्होंने बिग बास्केट के माध्यम से हिमाचल के शहद की मार्केटिंग को लेकर विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर प्रदेश सरकार के समक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए, ताकि मधुमक्खी पालकों को उनके उत्पाद के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध हो सके।
बैठक में उप-मुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में मधुमक्खी पालन एक महत्वपूर्ण व्यवसाय है और यह किसानों तथा बागवानों की आय का प्रमुख स्रोत भी है। उन्होंने बताया कि मधुमक्खी पालकों को हुए नुकसान का मामला मुख्यमंत्री के समक्ष भी उठाया गया था। इस अवसर पर निदेशक बागवानी सतीश कुमार, एचपी शिवा परियोजना निदेशक समीर राणा सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
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