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हिमाचल ने शिक्षा में की वापसी , राष्ट्रीय सर्वेक्षण में 21वें स्थान से शीर्ष स्थान पर पहुंचा

शिमला (हिमाचल प्रदेश): हिमाचल प्रदेश के शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने शुक्रवार को स्कूली शिक्षा में राज्य के उल्लेखनीय बदलाव की सराहना करते हुए घोषणा की कि राज्य ने शैक्षिक परिणामों में अग्रणी के रूप में अपना स्थान पुनः प्राप्त कर लिया है।

ठाकुर ने शिमला में संवाददाताओं से कहा, “हिमाचल प्रदेश के लिए यह बहुत गर्व की बात है कि ऐतिहासिक रूप से, आधुनिक हिमाचल के निर्माता डॉ. वाई.एस. परमार के समय से ही हम शिक्षा में उपलब्धियों के लिए जाने जाते हैं। 1947 में साक्षरता दर मात्र 7 प्रतिशत थी, जो 2011 तक बढ़कर 83 प्रतिशत हो गई।”

हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि हाल के वर्षों में हिमाचल प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता में गिरावट देखी गई है।

उन्होंने कहा, “पिछली सरकार के कार्यकाल के दौरान किए गए हालिया सर्वेक्षण चिंताजनक और निराशाजनक थे। भारत सरकार द्वारा किए गए राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वेक्षण से पता चला है कि 2021 में, हिमाचल प्रदेश, जो कभी शीर्ष पांच राज्यों में शामिल था, 21वें स्थान पर खिसक गया, जो हमारे लिए एक बड़ा झटका था।”

ठाकुर ने कहा, “एएसईआर रिपोर्ट से यह भी पता चला है कि आठवीं कक्षा के छात्र तीसरी कक्षा के पाठ्यक्रम के विषयों को पढ़ने या समझने में भी असमर्थ थे। इसी तरह, प्रदर्शन ग्रेडिंग इंडेक्स (पीजीआई) में, राज्य 18वें स्थान पर आ गया, जो स्पष्ट रूप से शैक्षणिक प्रदर्शन में गिरावट को दर्शाता है।”

ठाकुर ने कहा कि दिसंबर 2022 में सत्ता में आई सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार को विरासत में टूटी हुई अर्थव्यवस्था के साथ-साथ चरमराती शिक्षा प्रणाली भी मिली है और इससे दोहरी चुनौती सामने आई है।

उन्होंने बताया, “हमने साहसिक कदम उठाए और आज ये सुधार परिणाम दिखा रहे हैं। एएसईआर रिपोर्ट अब हिमाचल प्रदेश को पढ़ने और सीखने के परिणामों के लिए शीर्ष पर रखती है। हमने केरल को भी पीछे छोड़ दिया है। प्रदर्शन ग्रेडिंग इंडेक्स में हिमाचल प्रदेश 2024 में 21वें स्थान से 5वें स्थान पर पहुंच गया है।”

उन्होंने कहा, “हाल ही में हुए लर्निंग आउटकम टेस्ट में हिमाचल प्रदेश कक्षा 3 में दूसरे, कक्षा 9 में चौथे तथा राष्ट्रीय स्तर पर पांचवें स्थान पर रहा। 21वें स्थान से पांचवें स्थान पर आना कोई छोटी उपलब्धि नहीं है।”

उन्होंने कहा, “हमने आयोग के माध्यम से 700 व्याख्याताओं की भर्ती भी की, जबकि पिछली सरकार पांच वर्षों में केवल 500 नियुक्तियां ही कर पाई थी।”

मंत्री ने कहा, “एनईपी से संबंधित निर्देशों को लागू करने और उच्च शिक्षा को सुव्यवस्थित करने के लिए 136 कॉलेजों में 119 नए प्रिंसिपल पद भरे गए हैं, जिनमें से अधिकांश में पहले कोई प्रिंसिपल नहीं थे।” ठाकुर ने कहा, “स्कूल कैडर के लिए 2017 से प्रिंसिपलों की कोई नियमित पदोन्नति नहीं की गई है। हमने अब लगभग 1,900 स्कूल प्रिंसिपलों को नियमित कर दिया है और पदोन्नति प्रक्रिया शुरू हो गई है।”

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