
शिमला। राज्य सक्षम गुड़िया बोर्ड की उपाध्यक्ष अरुणा महाजन ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं के मासिक मानदेय में वृद्धि करने के लिए मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने हाल ही में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मासिक मानदेय 10,500 रुपये से बढ़ाकर 11,500 रुपये तथा सहायिकाओं का मानदेय 5,800 रुपये से बढ़ाकर 6,800 रुपये करने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार का यह निर्णय महिला सशक्तिकरण, सामाजिक सुरक्षा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के आर्थिक हितों को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्त्वपूर्ण कदम है।
अरुणा महाजन ने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाएं मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, पोषण, बच्चों की प्रारंभिक देखभाल तथा महिला एवं बाल विकास से संबंधित विभिन्न योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। वह धरातल पर सरकार की कल्याणकारी योजनाओं को आमजन तक पहुंचाने में अह्म योगदान देती हैं। ऐसे में मानदेय में वृद्धि, उनके कार्यों के प्रति सम्मान और उनके आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में सार्थक पहल है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में प्रदेश सरकार के कार्यकाल के दौरान आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं के मानदेय में प्रत्येक बजट में वृद्धि की गई है। वर्ष 2023-24 में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मासिक मानदेय 9,500 रुपये और सहायिकाओं का 5,200 रुपये था। वर्ष 2024-25 में यह बढ़कर क्रमशः 10,000 रुपये और 5,500 रुपये हुआ, जबकि वर्ष 2025-26 में कार्यकर्ताओं का मानदेय 10,500 रुपये तथा सहायिकाओं का 5,800 रुपये प्रतिमाह निर्धारित किया गया।
वर्ष 2026-27 में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय बढ़ाकर 11,500 रुपये और सहायिकाओं का 6,800 रुपये प्रतिमाह हो गया है। इस प्रकार वर्ष 2023-24 की तुलना में कार्यकर्ताओं के मासिक मानदेय में कुल 2,000 रुपये और सहायिकाओं के मानदेय में 1,600 रुपये की वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि यह निरंतर बढ़ोतरी आंगनबाड़ी कर्मियों के आर्थिक हितों को सुदृढ़ करने के लिए प्रदेश सरकार की प्रतिबद्धता को परिलक्षित करती है।
अरुणा महाजन ने कहा कि प्रदेश सरकार ने विधवा, निराश्रित एवं एकल महिलाओं को आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका के पदों पर नियुक्ति के अवसर उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से वार्षिक आय सीमा को 50 हजार रुपये से बढ़ाकर 75 हजार रुपये करने का निर्णय लिया है। इससे निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरा करने वाली महिलाओं को इन पदों के लिए आवेदन करने में सुविधा मिलेगी। उन्होंने इस निर्णय के लिए भी मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया।
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