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हिमाचल के बागवानों को बड़ा झटका, एफटीए से न्यूजीलैंड के सेब पर शुल्क घटा

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हिमाचल डेस्कः भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के तहत न्यूजीलैंड से आयात होने वाले सेब पर शुल्क 25 फीसदी घटा दिया गया है। इस फैसले से हिमाचल प्रदेश समेत उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर के सेब बागवानों को बड़ा झटका लगा है। अभी भारत में सेब पर आयात शुल्क 50 फीसदी है, लेकिन एफटीए के बाद न्यूजीलैंड से गाला सहित अन्य किस्मों के सेब सिर्फ 25 फीसदी शुल्क पर भारत पहुंचेंगे।

वर्तमान में न्यूजीलैंड से भारत में सालाना लगभग 31,392.6 टन सेब आयात होता है। न्यूजीलैंड में सेब की औसत पैदावार 53.6 टन प्रति हेक्टेयर है, जबकि भारत में यह केवल 9.2 टन प्रति हेक्टेयर है। शुल्क में कटौती के बाद सेब आयात के दोगुना होने की आशंका जताई जा रही है, जिसका सीधा नुकसान देश के सेब उत्पादकों को होगा।

समझौते के अनुसार न्यूजीलैंड से सेब का आयात एक अप्रैल से 31 अगस्त तक सीमित मात्रा में होगा, लेकिन आने वाले वर्षों में इसकी मात्रा बढ़ाई जाएगी। पहले पांच वर्षों तक न्यूजीलैंड को 32,500 टन सेब पर आयात शुल्क में छूट दी जाएगी। छठे वर्ष से यह कोटा बढ़ाकर 45,000 टन कर दिया जाएगा।

सेब के अलावा इन उत्पादकों को नुकसान

सेब के अलावा कीवी और नाशपाती उत्पादकों को भी नुकसान का अंदेशा है। एफटीए में कीवी पर आयात शुल्क पूरी तरह खत्म करने और नाशपाती पर शुल्क घटाने का निर्णय लिया गया है। हिमाचल के किसान संगठनों का कहना है कि इस समझौते में सेब, कीवी और नाशपाती उत्पादकों के हितों की अनदेखी की गई है।

इधर, अमेरिका भी भारत के साथ प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते में अपने सेब पर आयात शुल्क में छूट की मांग कर रहा है। संयुक्त किसान मंच के संयोजक हरीश चौहान का कहना है कि बागवानों के हितों को ताक पर रखकर यह समझौता किया गया है। वहीं, सेब उत्पादक संघ के समन्वयक संजय चौहान ने शुल्क कटौती को चिंताजनक बताया। उन्होंने कहा कि सेब बागवान पहले ही बढ़ती लागत से जूझ रहे हैं और विदेशों से सस्ता सेब आने पर बागवानी पूरी तरह बर्बाद हो सकती है।

केंद्र किसानों-बागवानों के हितों के खिलाफ फैसले ले रहा है : नेगी

हिमाचल प्रदेश के बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा कि केंद्र सरकार किसानों और बागवानों के हितों के खिलाफ फैसले ले रही है। न्यूजीलैंड के लिए आयात शुल्क में कटौती से प्रदेश के बागवानों को भारी नुकसान होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि एफटीए के प्रावधानों में सेब, कीवी और नाशपाती उत्पादकों के हितों की पूरी तरह अनदेखी की गई है।

सेब आयात की सीमा न बढ़े : राकेश

एसोसिएट प्रोफेसर (अर्थशास्त्र) राकेश कुमार शर्मा ने कहा कि न्यूजीलैंड से सेब आयात को लेकर जो कोटा तय किया गया है, उसमें बढ़ोतरी न हो, इसके लिए सरकार को गंभीर प्रयास करने होंगे। साथ ही हिमाचली सेब की कीमतों पर पड़ने वाले प्रभाव की लगातार निगरानी जरूरी है।

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