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हिमाचल की राष्ट्रीय स्कूल शिक्षा स्तर पर बड़ी उपलब्धि, देशभर में तीसरे स्थान पर पहुंचा

हिमाचल डेस्कः प्रदेश ने स्कूल शिक्षा में राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स 2.0 (2024–25) में हिमाचल प्रदेश ने राज्यों की श्रेणी में तीसरा स्थान और सभी राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों सहित कुल मिलाकर छठा स्थान प्राप्त किया है।

राज्य ने पिछले वर्ष के 13वें स्थान से इस बार 7 पायदान की बड़ी छलांग लगाई है। हिमाचल का कुल पीजीआई स्कोर 2023–24 के 573.8 अंकों से बढ़कर 2024–25 में 659.2 अंक हो गया है, यानी एक साल में 85.4 अंकों की उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इस प्रदर्शन के साथ हिमाचल को “प्रचेष्टा-2” श्रेणी में रखा गया है, जो इस मूल्यांकन चक्र की दूसरी सर्वोच्च श्रेणी है।

सरकार और कारण

राज्य के शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने इस सफलता का श्रेय कांग्रेस सरकार द्वारा शिक्षा क्षेत्र में किए गए सुधारों को दिया। उन्होंने बताया कि सरकार ने शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार को Prioritise किया है और कार्यसंस्कृति में बदलाव, जवाबदेही तय करने तथा शिक्षा तंत्र में सुधार के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं जिनके सकारात्मक परिणाम अब दिख रहे हैं।

प्रमुख क्षेत्रों में प्रदर्शन

परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स 2.0 राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के लक्ष्यों के अनुरूप 6 प्रमुख क्षेत्रों और 70 संकेतकों के आधार पर राज्यों का मूल्यांकन करता है। रिपोर्ट में हिमाचल के प्रदर्शन के मुख्य अंश निम्न हैं:-

समानता: 90.5%

शिक्षा तक पहुंच: 86.6%

शिक्षक शिक्षा एवं प्रशिक्षण: 80.3%

सबसे उल्लेखनीय सुधार “लर्निंग आउटकम्स एंड क्वालिटी” श्रेणी में हुआ, जहाँ स्कोर 54.2 से बढ़कर 117.9 हो गया—यह छात्रों की सीखने की स्तर और शिक्षा गुणवत्ता में बड़े सुधार का संकेत है। साथ ही बेसिक सुविधाओं व इन्फ्रास्ट्रक्चर में भी सुधार हुआ; इस श्रेणी का स्कोर 97.0 से बढ़कर 110.5 अंक तक पहुंचा।

जिला स्तर पर परिणाम

पीजीआई-डी (जिला प्रदर्शन) में भी अधिकांश जिले बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदेश के 12 में से 11 जिले “उत्तम-3” श्रेणी में शामिल हुए हैं। हमीरपुर 417 अंकों के साथ सर्वश्रेष्ठ जिला बना। जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति ने 372 अंक हासिल कर उल्लेखनीय प्रगति दिखाई। किन्नौर अभी भी “प्रचेष्टा-1” श्रेणी में बना हुआ है।

सुधार की आवश्यकता — प्रशासनिक प्रक्रिया

हालांकि समग्र प्रदर्शन बेहतर हुआ है, रिपोर्ट में “गवर्नेंस प्रोसेस” को चिंता का विषय बताया गया है। इस क्षेत्र में हिमाचल को 130 में से केवल 45.9 अंक मिले हैं। रिपोर्ट ने प्रशासनिक व्यवस्थाओं के डिजिटलीकरण, फंड रिलीज के लिए आधार सीडिंग और प्रबंध पोर्टल के प्रभावी उपयोग, शिक्षकों व विद्यार्थियों की डिजिटल उपस्थिति प्रणाली और इंटरनेट-आधारित स्कूल प्रक्रियाओं के विस्तार की सिफारिश की है, ताकि जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके और फंड समय पर जारी हों।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के लक्ष्यों की दिशा में प्रगति

शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पीजीआई और पीजीआई-डी दोनों रैंकिंग में यह उन्नति राज्य सरकार के गुणवत्तापूर्ण, समावेशी और समान शिक्षा पर लगातार फोकस का परिणाम है। हिमाचल प्रदेश अब उन चुनिंदा राज्यों में शामिल हो गया है जिन्होंने स्कूल शिक्षा में उल्लेखनीय सुधार का मॉडल स्थापित किया है।

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