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CII पावर कॉन्क्लेव में हिमाचल की स्वच्छ ऊर्जा क्षमता और निवेश अवसरों पर चर्चा

चंडीगढ़: हिमाचल प्रदेश में अक्षय ऊर्जा क्षेत्र के विस्तार और निवेश की संभावनाओं को लेकर चंडीगढ़ में आयोजित 6वें सीआईआई पावर कॉन्क्लेव में सरकार और उद्योग जगत के विशेषज्ञों ने व्यापक विचार-विमर्श किया। कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (सीआईआई) हिमाचल प्रदेश की ओर से आयोजित इस सम्मेलन में जलविद्युत, सौर ऊर्जा, ऊर्जा भंडारण और बिजली ग्रिड से जुड़े विषय प्रमुखता से उठाए गए। सीआईआई नॉर्दर्न रीजन के चंडीगढ़ स्थित मुख्यालय में हुए सम्मेलन के मुख्य अतिथि हिमाचल प्रदेश सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव (एमपीपी एंड पावर एवं एनसीईएस) आर. डी. नाज़ीम, आईएएस रहे। उन्होंने राज्य में ऊर्जा क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार की ओर से किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि निवेशकों और उद्योगों के लिए परियोजनाओं की स्वीकृति प्रक्रिया को सरल बनाने पर ध्यान दिया जा रहा है। इसी दिशा में सिंगल-विंडो क्लीयरेंस व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया गया है, ताकि परियोजनाओं को आवश्यक मंजूरियां अपेक्षाकृत सुगमता से मिल सकें और निवेश का माहौल बेहतर हो। आर. डी. नाज़ीम ने हिमाचल की पर्यावरणीय संवेदनशीलता का उल्लेख करते हुए कहा कि ऊर्जा संसाधनों के विकास में पारिस्थितिक संतुलन को प्राथमिकता देना जरूरी है। उन्होंने बताया कि जलविद्युत परियोजनाओं के पर्यावरणीय प्रभावों को समझने के लिए हिमाचल प्रदेश में रिवर बेसिन अध्ययन की पहल की गई है। उनके अनुसार राज्य में उपलब्ध अक्षय ऊर्जा संसाधनों का योजनाबद्ध इस्तेमाल उद्योगों को प्रतिस्पर्धी दरों पर बिजली उपलब्ध कराने के साथ-साथ निवेश के लिए राज्य की क्षमता को बढ़ा सकता है। कॉन्क्लेव में ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी कई प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इनमें जेएसडब्ल्यू एनर्जी, एडी हाइड्रो पावर, मलाना पावर कंपनी, एनरग्रिड, ग्रीनको, टू-पॉइंट-ओ कैपिटल, श्नाइडर इलेक्ट्रिक, जीएमआर बजोली होली हाइड्रो पावर, एनएचपीसी, डेल्टा पावर और साई ऊर्जा हाइडल प्रोजेक्ट्स सहित अन्य संस्थान शामिल रहे। सम्मेलन के दौरान हिमाचल प्रदेश में मौजूद जलविद्युत और सौर ऊर्जा क्षमता को व्यापक स्तर पर उपयोग में लाने के तरीकों पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों और उद्योग प्रतिनिधियों ने ऊर्जा भंडारण, बिजली के ग्रिड से अक्षय ऊर्जा के बेहतर एकीकरण तथा निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने को महत्वपूर्ण विषय बताया। सौर और हाइब्रिड ऊर्जा परियोजनाओं के साथ-साथ विकेंद्रीकृत बिजली उत्पादन और नए स्वच्छ ऊर्जा अनुप्रयोगों को लेकर भी संभावनाओं पर चर्चा की गई। उद्योग जगत की ओर से दीर्घकालिक निवेश को बढ़ावा देने के लिए स्पष्ट नीतियों, समयबद्ध स्वीकृतियों और स्थिर कारोबारी वातावरण की जरूरत पर जोर दिया गया। कॉन्क्लेव में ट्रांसमिशन नेटवर्क और ऊर्जा भंडारण की क्षमता बढ़ाने पर भी विचार हुआ। विशेषज्ञों ने ऐसी तकनीकों और कारोबारी मॉडल पर अपने विचार रखे, जिनके माध्यम से अक्षय ऊर्जा की बढ़ती हिस्सेदारी के बीच बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता और ग्रिड की क्षमता को मजबूत किया जा सके। सीआईआई हिमाचल प्रदेश के चेयरमैन एवं मोरपेन लेबोरेटरीज के मैनेजिंग डायरेक्टर संजय सूरी ने कहा कि राज्य में निजी निवेश को आकर्षित करने के लिए उद्योगों के अनुकूल वातावरण तैयार करना आवश्यक है। उन्होंने सतत औद्योगिक विकास के लिए सरकार और निजी क्षेत्र के बीच प्रभावी समन्वय की आवश्यकता पर भी बल दिया। कॉन्क्लेव के समापन पर हिमाचल प्रदेश की अक्षय ऊर्जा क्षमता के बेहतर उपयोग, ऊर्जा बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और निवेश के नए अवसर विकसित करने के लिए सरकार तथा उद्योग के बीच संवाद को आगे भी जारी रखने पर जोर दिया गया।
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