HP Focuses on Senior Welfare : शिमला। अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस पर गेयटी थियेटर में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में स्वास्थ्य एवं सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. कर्नल धनी राम शांडिल ने वरिष्ठजनों के सम्मान, स्वास्थ्य और सामाजिक भागीदारी पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि प्रदेश में बेसहारा वृद्धजनों की देखभाल के लिए 12 वृद्धाश्रम, 22 डे-केयर सेंटर और 5 वरिष्ठ नागरिक सुविधा केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। 60 वर्ष से अधिक आयु के करीब 6.62 लाख वरिष्ठ नागरिकों को बिना आय सीमा सामाजिक सुरक्षा पेंशन दी जा रही है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ कर्नल धनी राम शांडिल ने कहा कि वरिष्ठजनों, अधिकारियों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों तथा विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों को अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि इस वर्ष अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस की थीम “दीर्घायु का युग: वृद्धावस्था के लिए प्रणालियों पर पुनर्विचार” है। इसका उद्देश्य वृद्धजनों की देखभाल के साथ-साथ उन्हें समाज में सक्रिय एवं सम्मानजनक योगदान के अवसर उपलब्ध करवाना है।
12 वृद्धाश्रम, 22 डे-केयर सेंटर और 5 वरिष्ठ नागरिक सुविधा केंद्र* मंत्री ने कहा कि प्रदेश में बेसहारा वृद्धजनों की देखभाल एवं संरक्षण के लिए 12 वृद्धाश्रम, 22 डे-केयर सेंटर और 5 वरिष्ठ नागरिक सुविधा केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। इनमें वृद्धजनों को आवास, भोजन, चिकित्सा और मनोरंजन सहित विभिन्न सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा रही हैं। प्रदेश में 60 वर्ष से अधिक आयु के लगभग 6.62 लाख वरिष्ठ नागरिकों को बिना आय सीमा के सामाजिक सुरक्षा पेंशन प्रदान की जा रही है। इस पर लगभग 1,400 करोड़ रुपये वार्षिक व्यय किए जा रहे हैं।
पिछले साढ़े तीन वर्षों में 99,779 नए वृद्धजनों को सामाजिक सुरक्षा पेंशन प्रदान की गई है। वृद्धजनों के अधिकारों के संरक्षण के लिए प्रदेश में माता-पिता भरण-पोषण एवं वरिष्ठ नागरिक कल्याण अधिनियम के प्रावधान लागू हैं। वरिष्ठजनों की शिकायतों एवं घरेलू हिंसा से संबंधित मामलों के निवारण के लिए हेल्पलाइन नंबर 14567 उपलब्ध है। डॉ. शांडिल ने कहा कि विभाग द्वारा वरिष्ठजनों के स्वास्थ्य की नियमित जांच, निःशुल्क चिकित्सा एवं ऑपरेशन के साथ-साथ डिमेंशिया जैसी समस्याओं के संबंध में जागरूकता एवं जांच शिविर आयोजित किए जा रहे हैं।
अकेलेपन और सामाजिक अलगाव को कम करने के लिए युवाओं और वरिष्ठजनों को साथ जोड़कर अंतर-पीढ़ीगत संवाद एवं गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। कार्यक्रम में युवाओं को नशे से दूर रखने और उन्हें सकारात्मक दिशा प्रदान करने पर भी विशेष बल दिया गया। डॉ. शांडिल ने कहा कि मानव जीवन अनमोल है और इंसान का जन्म बड़ी मुश्किल से मिलता है। इसलिए हमें अच्छे कर्म करने, मानवता की सेवा करने और सकारात्मक मूल्यों के साथ जीवन जीने का प्रयास करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि नशे की समस्या केवल एक व्यक्ति को प्रभावित नहीं करती, बल्कि पूरे परिवार और समाज पर इसका गंभीर प्रभाव पड़ता है। इसलिए नशे के खिलाफ खुलकर जागरूकता पैदा करना और समय रहते बच्चों को सही दिशा देना आवश्यक है। उन्होंने वरिष्ठजनों और अभिभावकों से आग्रह किया कि वे बच्चों को छोटी उम्र से ही रचनात्मक एवं सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ें। बच्चों को सितार, तबला और अन्य वाद्य यंत्र सीखने, खेलकूद, विज्ञान, कला, पर्वतारोहण, साहसिक खेलों तथा अन्य रुचिकर गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
मेष: दिन शुभ रहेगा...