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एचपीयू में शोध पद्धति पर छह दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला में बंटा ज्ञान

HPU Concludes Six-Day National Research Workshop : शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) के शारीरिक शिक्षा विभाग की ओर से शोध पद्धति एवं सांख्यिकी विषय पर आयोजित छह दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का शनिवार को समापन हुआ। कुलपति प्रो. महावीर सिंह ने समापन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की और शोधार्थियों व शिक्षकों के लिए शोध पद्धति के व्यावहारिक ज्ञान को महत्वपूर्ण बताया। कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को शोध पत्र लेखन, सांख्यिकीय अनुप्रयोगों, साहित्यिक चोरी से बचाव और शोध नैतिकता की जानकारी दी गई। कुलपति ने विभिन्न शैक्षणिक विषयों के बीच सहयोग बढ़ाने पर जोर देते हुए कहा कि अंतरविषयक शोध से अकादमिक गुणवत्ता और शोध के नए अवसरों को मजबूती मिलेगी।
विश्वविद्यालय के वीसी समिति कक्ष में आयोजित समापन समारोह में कुलपति प्रो. महावीर सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यशाला के अंतिम दिन सुबह के सत्र में एचपीयू के जैव प्रौद्योगिकी विभाग के सहायक आचार्य डॉ. रवि कांत भाटिया ने प्रतिभागियों को शोध पत्र लेखन, आलेख लेखन और साहित्यिक चोरी (प्लेजरिज्म) जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर जानकारी दी। उन्होंने शोध कार्य में अकादमिक ईमानदारी, शोध नैतिकता और गुणवत्तापूर्ण प्रकाशन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का समाधान भी किया।
समापन समारोह का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और मां सरस्वती के वंदन के साथ हुआ। इस अवसर पर गणित के प्रोफेसर एवं दूरस्थ एवं ऑनलाइन शिक्षा केंद्र से जुड़े प्रो. हरि मोहन विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। एचपीयू के डीन ऑफ प्लानिंग एंड टीचर मैटर्स एवं डीन ऑफ रिसर्च प्रो. नैन जीत सिंह नेगी तथा पूर्व डीन प्रो. जे.एस. धीमान सहित अन्य शिक्षाविद् और संकाय सदस्य भी समारोह में मौजूद रहे। शिक्षा संकाय के डीन प्रो. हरि सिंह ने स्वागत संबोधन दिया, जबकि शारीरिक शिक्षा विभाग के अध्यक्ष एवं कार्यशाला संयोजक डॉ. मनोहर लाल ने छह दिवसीय कार्यशाला की गतिविधियों और उपलब्धियों का विवरण प्रस्तुत किया। मुख्य अतिथि कुलपति प्रो. महावीर सिंह ने कार्यशाला के सफल आयोजन के लिए विभाग को बधाई दी। उन्होंने कहा कि शोध पद्धति और सांख्यिकी का व्यावहारिक ज्ञान शोधार्थियों एवं शिक्षकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने शारीरिक शिक्षा, जीवन विज्ञान, सामाजिक विज्ञान और अन्य विषयों के बीच अंतरविषयक सहयोग को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उनके अनुसार, विभिन्न विषयों के बीच समन्वय से शोध के नए अवसर खुलेंगे और अकादमिक गुणवत्ता को मजबूती मिलेगी। कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कार्यशाला के संवादात्मक और व्यावहारिक स्वरूप की सराहना की। अंत में डॉ. मनोहर लाल ने अतिथियों, विशेषज्ञों, संकाय सदस्यों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। मंच संचालन शारीरिक शिक्षा विभाग की शोधार्थी दीक्षा शर्मा ने किया। कार्यशाला का सफल समापन विश्वविद्यालय में शोध संस्कृति को मजबूत करने, शोधार्थियों के कौशल विकास और विभिन्न शैक्षणिक विषयों के बीच सहयोग को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल रहा।
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